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special category status to Rajasthan मोदी सरकार से ये दर्जा देने की फिर उठी मांग

Demand special category status Rajasthan तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने मांग रखी कि राजस्थान राज्य की कॉस्ट ऑफ सर्विस डिलीवरी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा है ऎसे में केन्द्र सरकार की ओर से राजस्थान को special category का दर्जा दिया जाए।

जयपुर

Updated: December 30, 2021 08:46:36 pm

Demand special category status Rajasthan तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने मांग रखी कि राजस्थान राज्य की कॉस्ट ऑफ सर्विस डिलीवरी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा है ऎसे में केन्द्र सरकार की ओर से राजस्थान को special category का दर्जा दिया जाए।
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cm ashok gehlot
डॉ गर्ग गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रीयों के साथ आगामी बजट के संबंध में हुई बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Ashok Gehlot के नेतृत्व में राज्य सरकार की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली पॉलिसिज की बदौलत, राजस्थान देश के सबसे बड़े इंवेस्टमेंट हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में 24 एवं 25 जनवरी, 2022 को इन्वेस्टमेंट राजस्थान समिट भी होने वाला है, इसमें अभी तक साढ़े 5 लाख करोड़ रूपयें से अधिक के 487 समझौते हो चुके है, जिनसे लगभग 3 लाख 28 हजार लोगों को रोजगार मिलने की आशा है।
ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को शीघ्र करें राष्ट्रीय परियोजना घोषित

डॉ गर्ग ने मांग रखी कि ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को शीघ्र राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही मरूस्थलीय एवं आदिवासी क्षेत्रों की मुख्य 5 पांच परियोजनाओं को स्वीकृत कर 100 प्रतिशत खर्चा केन्द्र सरकार को वहन करना चाहिये। ऎसा करने से पूरे राजस्थान में निवेश का माहौल सुधरेगा। डॉ गर्ग ने कहा कि जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकार का वित्त पोषण अनुपात 90:10 का किया जाना चाहिए। साथ ही इस योजना में केन्द्रांश के पुनर्भरण की अवधि को 2 वर्ष के लिए बढ़ाकर मार्च, 2026 की जानी चाहिए।
राजस्व घाटा अनुदान को बढ़ाया जाए

डॉ गर्ग ने कहा कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण राज्य अर्थव्यवस्था के प्रभावित हुई है। ऎसे में राजस्व घाटा अनुदान को वर्ष 2022-23 के लिए 4862 करोड़ रुपए से बढाकर 9878 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए तथा उक्त अनुदान को 2023-24 से 2025-26 की अवधि मेें जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने बैठक में मांग रखी कि 15वे वित्त आयोग की सिफारिशों में शिथिलता दी जानी चाहिए। यह शिथिलता देते हुए सामान्य उधार सीमा को वर्ष 2021-22 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पादन का 5.0 प्रतिशत तथा वर्ष 2022-23 से वर्ष 2024-25 के लिए 4.5 प्रतिशत किया जाना चाहिए। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा राज्य को अनुमत सकल ऋण सीमा में वृद्धि होनी चाहिये।
आयुष्मान भारत योजना में प्रीमियम राशि पर हटाई जाए सीलिंग

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत प्रति परिवार प्रतिवर्ष 1 हजार 52 रुपये की सीलिंग है। राज्य सरकार द्वारा 59.71 लाख सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना, 2011 के परिवारों के साथ-साथ एनएफएसए परिवारों को भी जोड़ कर 1.1 करोड़ परिवारों के लिये बीमा कम्पनी को 1 हजार 662 रुपये प्रतिवर्ष प्रति परिवार की दर से प्रीमियम राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि केन्द्र सरकार की ओर से 1 हजार 52 रुपये की सीलिंग हटाई जाए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग योजना से लाभान्वित हो सकें। साथ ही एनएफएसए परिवारों का भी प्रीमियम का भुगतान किया जाए।
सोने एवं चांदी पर आयात शुल्क घटाया जाए

डॉ गर्ग ने कहा कि वर्तमान में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 7.5 प्रतिशत और प्लेटिनम पर 10 प्रतिशत है। इसे घटाकर 4 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय उत्पाद दुबई, सिंगापुर आदि से प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके साथ ही उन्होने अनुरोध किया कि विदेशी आयात के कारण भारी घाटे में चल रहे स्थानीय खनन उद्योग को बचाने के लिए विट्रिफाईड टाइल्स के आयात पर वर्तमान बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत को बढ़ाकर 25 प्रतिशत की जानी चाहिए।

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