हमेशा की विकलांगता का कारण बन सकता है spina bifida

जब शिशु गर्भ में होता है तो उस दौरान होने वाली लापरवाही उसके लिए बेहद हानिकारक हो सकती है। नवजात शिशुओं में जन्मजात होने वाली Spina bifida एक ऐसी ही गंभीर बीमारी है, जिससे बच्चा जीवनभर के लिए अपाहिज हो सकता है। यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी में होने वाली जन्मजात विकृति होती है, जिसे जन्म से पहले ही पता किया जा सकता है। पैदा होने के बाद अगर बच्चे की पीठ में गांठ होती है, जिसमें पानी या अन्य टिश्यू भरे होते हैं वही Spina bifida होता है।

By: Tasneem Khan

Updated: 05 Feb 2021, 06:10 PM IST

Jaipur जब शिशु गर्भ में होता है तो उस दौरान होने वाली लापरवाही उसके लिए बेहद हानिकारक हो सकती है। नवजात शिशुओं में जन्मजात होने वाली स्पाइना बिफिडा एक ऐसी ही गंभीर बीमारी है, जिससे बच्चा जीवनभर के लिए अपाहिज हो सकता है। यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी में होने वाली जन्मजात विकृति होती है, जिसे जन्म से पहले ही पता किया जा सकता है। पैदा होने के बाद अगर बच्चे की पीठ में गांठ होती है, जिसमें पानी या अन्य टिश्यू भरे होते हैं वही स्पाइनल बिफिडा होता है।

गंभीर है यह बीमारी
पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जन डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि स्पाइना बिफिडा तंत्रीकीय नाल की विकृति है। दरार युक्त रीढ़ के पूरी तरह से घिरे न होने पर यह रोग होता है। यह रोग तब बहुत गंभीर होता है जब दरार वाली जगह के नीचे की पेशियां कमजोर होती हैं या उससे नीचे के हिस्से में लकवा हो जाता है और संवेदनशीलता खत्म हो जाती है। गर्भ में 20 हफ्ते के शिशु होने पर इस रोग का पता लगाया जा सकता है। यदि बच्चे में रोग की पहचान हो जाती है उसकी डिलीवरी से पहले सर्जरी कर स्थिति सुधारने की कोशिश की जा सकती है। यदि पहले ऐसा बच्चा हो तो दूसरे में भी ऐसा विकार होने की संभावना तीन से चार प्रतिशत बढ़ जाती है। इसका पता लगाने के लिए प्रीनेटल स्क्रीनिंग टेस्ट, सीरम अल्फा फेफप्रोटीन परीक्षण, अल्ट्रासाउंड जैसी जांचे की जाती हैं।

तीन तरह का होता है स्पाइना बिफिडा

स्पाइना बिफिडा तीन तरह का होता है, स्पाइना बिफिडा ओक्युल्टा, मेनिंगोसील और माइलोमेनिंगोसील। स्पाइना बिफिडा ओक्युल्टा में रीढ़ की हड्डियों में नुकसान पहुंचे बिना उसमें छेद हो जाता है। यह सबसे हल्का और सामान्य प्रकार है। वहीं मोनिंगोसील रीढ़ की हड्डी में एक छेद होता है जिसे स्पाइनल कॉर्ड की सुरक्षा कवच में दबाव के कारण वो थैली के रूप में बाहर बनकर आ जाती है और यह सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें स्पाइनल कॉर्ड सुरक्षित रहती है और इसकी मरम्मत की जा सकती है। डॉ. विकास ने बताया कि माइलोमेनिंगोसिल एक गंभीर स्पाइना बिफिडा का प्रकार है। इसमें स्पाइनल कॉर्ड का एक हिस्सा पीठ की तरफ से बाहर निकल कर आ जाता है।

गर्भावस्था के दौरान लापरवाही पड़ सकती है भारी

गर्भवस्था के दौरान महिला को खान-पान का ध्यान रखने की खास अवश्यकता होती है। शिशु को यह रोग न हो इसके लिए उन्हें फॉलिक एसिड युक्त चीजों का सेवन प्रचुर मात्रा में करना चाहिए और धूम्रपान से परहेज रखना चाहिए। जो महिलाएं मोटापे, डायबिटीज से पीड़ित होती हैं उनके शिशु को यह रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। बच्चा अगर स्पाइना बिफिडा से ग्रस्त हो गया तो उसे चलने-फिरने में असमर्थता, टेढ़ी रीढ़ की हड्डी, मानसिक कमजोरी, मल-मूत्र पर नियंत्रण न होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान ही स्पाइना बिफिडा की पहचान हो जाती है और यह गंभीर होता है तो गर्भपात कराया जा सकता है।

Tasneem Khan Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned