36 साल बाद मकान और मिलेंगे 5.5 लाख

36 साल बाद मकान और मिलेंगे 5.5 लाख

Mahesh Chand Gupta | Publish: Sep, 02 2018 02:40:32 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

- राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने दिया आदेश, आवासन मंडल को दो माह में पालना करने को कहा

जयपुर. आवासन मंडल को मकान आवंटन पर 36 साल से की जा रही लुकाछिपी महंगी पड़ गई है। राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के आदेश पर आवासन मंडल को न केवल 36 साल पुरानी वरीयता के आधार पर मकान देना पडेग़ा, बल्कि मानसिक संताप व परिवाद व्यय के लिए साढे़ पांच लाख रुपए हर्जाना भी देना होगा। दो माह के भीतर इन सबके साथ परिवाद पेश करने की तारीख से नौ प्रतिशत ब्याज भी देने को कहा गया है।

राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के सदस्य (न्यायिक) कमल कुमार बागड़ी व सदस्य मीना मेहता की बेंच ने नवरतन नाहटा व गौरव नाहटा के परिवाद पर यह आदेश दिया है। परिवादी के अधिवक्ता आदित्य मित्रुका ने को आयोग को बताया कि आवासन मंडल की योजना में 1982 में आवेदन किया गया और परिवादी को मकान आरक्षण की सूचना भी मिल गई। अप्रेल 1991 में प्रार्थी ने 20 हजार रुपए का चेक जमा करा दिया, लेकिन मकान आवंटन नहीं हुआ। स्ववित्त पोषित योजना के तहत सहमति नहीं दिए जाने का हवाला देकर आवंटन निरस्त कर दिया गया। परिवादी ने तत्कालीन आवासन मंडल अध्यक्ष परसराम मोरदिया को ज्ञापन दिया, तो तथ्यों के परीक्षण के बाद पंजीयन बहाल कर दिया गया। मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार के अंतिम छह माह के निर्णयों का परीक्षण करने के बाद पंजीयन बहाली का आदेश रद्द कर दिया, इसके खिलाफ ही यह परिवाद दायर किया गया।

यह दिया आयोग ने आदेश

आयोग ने परिवादी का पंजीयन रद्द करने का 18 दिसम्बर 2014 का आदेश निरस्त करते हुए कहा है कि परिवादी को 1992 की वरीयता के अनुसार मकान आवंटित किया जाए। इसके लिए उससे कनिष्ठ आवंटियों पर लगाई शर्त लगाने की छूट दे दी। वहीं परिवादी को दो माह के भीतर के मकान के साथ पांच लाख रुपए मानसिक संताप, 50 हजार रुपए परिवाद व्यय व परिवाद पेश करने के दिन से 9 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज दिया जाए।

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