राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर!

पर्यावरण विभाग का नाम बदलकर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय गठित किया

बड़ी योजनाओं की नहीं हुई घोषणा
नाम बदलने तक ही सीमित रहा कार्य

By: Suresh Yadav

Published: 20 Feb 2020, 12:47 AM IST

जयपुर। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक मुद्दा है। इस पर विश्व समुदाय से लेकर देश की केन्द्र सरकार भी चिंतित है। जलवायु परिवर्तन की दिशा में केन्द्र सरकार ने बजट में कई घोषणाएं की। इसी क्रम में राजस्थान की गहलोत सरकार ने भी पहल करते हुए वर्ष 2019-20 के बजट भाषण में जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पर्यावरण विभाग का नाम बदलकर उसे पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय के रूप में गठित किए जाने की बात कही थी। बजट घोषणाओं की क्रियान्विति के फलस्वरूप 4 सितम्बर 2019 को पर्यावरण विभाग की ओर से निदेशालय बनाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके बाद राजस्थान में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय अस्तित्व में आ गया था। अब जो भी मामले पर्यावरण संबंधी होते हैं वह अब निदेशालय से होकर ही जाते हैं। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को लेकर अधिक काम किया जाना था।
राज्य सरकार ने पर्यावरण विभाग को और अधिक सशक्त बनाकर प्रदेश की जलवायु में सुधार का लक्ष्य रखा था। और बजट में भी इसी को ध्यान में रखकर पर्यावरण विभाग को निदेशालय बनाए जाने की घोषणा की थी।
देश में राजस्थान ऐसा राज्य है जहां के कई जिलों की जलवायु विषम है। और इस विषम जलवायु में भी बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असर नजर आ रहा है। जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर कई देश बैठकें कर चिंता जता चुके हैं। साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकने पर चर्चा कर चुके हैं। भारत में भी केन्द्र सरकार की ओर से हाल ही में पेश किए गए बजट में भी नदियों, जीव जन्तुओं, वनों, वनस्पतियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई घोषणाएं की गई है। साथ ही जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई थी।
राजस्थान जलवायु की दृष्टि से अनेक विविधताओं को अपने आप में समेटे हुए है। जिसमें बड़ा भू भाग सूखे की चपेट में रहता है। वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन का असर यहां भी हुआ है। इसके प्रभाव के कारण भूजल स्तर में कमी आती जा रही है। कई जिले डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। पशु-पक्षियों की कई प्रजातियों पर भी इसका संकट दिखने लगा है। प्रदेश के राज्य पक्षी गोडावन की संख्या में भी निरंतर कमी आती जा रही है। राजस्थान में इनकी संख्या 111 के लगभग बताई जाती है। जलवायु परिवर्तन का असर प्रदेश की बर्ड सेंचुरीज में भी नजर आ रहा है। पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध सरिरस्का, केवलादेव जैसे पक्षी अभयारण्यों में भी दूसरे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार कमी आती जा रही है। जो कि चिंता का विषय है।
हालांकि राज्य की गहलोत सरकार ने गत बजट में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय का गठन कर जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों को रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाया था लेकिन वर्तमान में निदेशालय को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। साथ ही जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में प्रभावी योजनाएं बनाई जानी चाहिए , तभी इस निदेशालय की सार्थकता साबित होगी।

Suresh Yadav Desk
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