जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए राज्य सरकार लेगी फ्रांस के विशेषज्ञों की मदद,सीतापुरा से अम्बाबाड़ी के मेट्रो रूट में तलाशेगी खामियां

जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जयपुर मेट्रो फेज-2 की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट की समीक्षा कर उसकी खामियां ढूंढ़ने का काम फ्रांस की कंपनी को सौंपा है।

By: rajesh walia

Updated: 11 Sep 2017, 11:32 AM IST

जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 के प्रति निवेशकों की अनिच्छा देखते हुए अब राज्य सरकार फ्रांस के विशेषज्ञों की मदद लेने जा रही है। जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जयपुर मेट्रो फेज-2 की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा कर उसकी खामियां ढूंढ़ने का काम फ्रांस की कंपनी को सौंपा है। अब फ्रेंच कंपनी मेट्रो फेज-2 की डीपीआर का रिव्यू कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। जानकारी के अनुसार फ्रांस की कंपनी एजिस रेल एसए, एजिस इंडिया कंसल्टिंग इंजीनियर्स प्राईवेट लिमिटेड और फीडबैक इंडिया प्राईवेट लिमिटेड जेवी को मेट्रो फेज-2 की डीपीआर का रिव्यू करने का जिम्मा दिया गया है। अब ये कंपनी सीतापुरा से अम्बावाड़ी तक करीबन 24 किलोमीटर लम्बे मेट्रो रूट की समीक्षा कर उसमें खामियां तलाशेगी, जिसके कारण निवेशक प्रोजेक्ट में रूचि नहीं दिखा रहे हैं।

 

 

लागत में कमी कैसे हो-

जेएमआरसी अधिकारियों का कहना है कि फेज-2 की डीपीआर को रिव्यू करने का मकसद प्रोजेक्ट की लागत में कमी करना भी है। फ्रांस की कंपनी के एक्सपर्ट दुनिया में मेट्रो ट्रेन से जुड़ी नई तकनीक से लागत कम करने के उपाय भी तलाशेंगे। मेट्रो फेज—2 की डीपीआर में लागत 10,300 करोड़ अनुमानित है। बताया जा रहा है कि लागत ज्यादा होने के कारण भी निवेशक इसमें रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए राज्य सरकार की कोशिश है कि मेट्रो फेज—2 की लागत में कमी आए। ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।

 

2 साल में डेढ़ गुनी हुई लागत -

गौरतलब है कि जयपुर मेट्रो फेज—2 की पहली डीपीआर 2012 में बनी थी। इसमें सीतापुरा से अम्बावाड़ी तक करीब 24 किलोमीटर लम्बे रूट पर मेट्रो चलाने का खर्च 6,583 करोड़ रूपए अनुमानित था। जो संशोधित डीपीआर में बढ़कर 10,300 करोड़ रूपए हो गया। संशोधित डीपीआर में एक और बदलाव ये आया कि इसमें अंडरग्राउंड स्टेशनों की संख्या 5 से बढ़कर 7 हो गई। जबकि एलिवेटेड स्टेशन की संख्या 15 से घटकर 13 हो गई।

 

5 देशों ने खींचे निवेश से हाथ -

राज्य सरकार ने फेज—2 में निवेश तलाशने के लिए 2012 में बनी डीपीआर में जुलाई 2014 में संशोधन किया। सरकार की कोशिशों से 5 देशों की कंपनियां जयपुर मेट्रो का दौरा करने आईं। इनमें चीन, अमेरिका, सिंगापुर, कोरिया और मलेशिया की निवेशक कंपनियों के प्रतिनिधि मंडल शामिल थे। सिंगापुर की टीम तो दो बार फेज—2 रूट का दौरा करके गई। लेकिए एक ही साल में पांचों कंपनियों ने एक—एक करके निवेश से हाथ खींच लिए। इससे मेट्रो का फेज—2 अटक गया, जो अब तक अटका है। अब सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कंसल्टेंट्स से डीपीआर का रिव्यू करवाने जा रही है।

 

ग्राफिक्स मेट्रो फेज—2 की संशोधित डीपीआर 2014 अनुमानित लागत —

10,300 करोड़ लम्बाई — 23.8 किमी एलिवेटेड हिस्सा — 13.808 किमी अंडरग्राउंड हिस्सा — 9.963 किमी कुल स्टेशन — 20 अंडरग्राउंड स्टेशन — 07 एलिवेटेड स्टेशन — 13 मेट्रो

फेज—2 डीपीआर 2012 अनुमानित लागत

6,583 करोड़ लम्बाई — 23.099 किमी अंडरग्राउंड हिस्सा — 5.095 किमी एलिवेटेड हिस्सा — 18.04 किमी कुल स्टेशन — 20 अंडरग्राउंड स्टेशन — 05 एलिवेटेड स्टेशन — 15

rajesh walia Desk/Reporting
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