आयुर्वेद वैकल्पिक नहीं, स्थापित और कारगर चिकित्सा पद्धति है

जयपुर . Ayurveda Minister Dr. Raghu Sharma ने कहा कि Ayurveda वैकल्पिक नहीं बल्कि स्थापित व कारगर चिकित्सा पद्धति है।

By: Anil Chauchan

Published: 13 Nov 2020, 03:26 PM IST

जयपुर . आयुर्वेद मंत्री डॉ. रघु शर्मा ( Ayurveda Minister Dr. Raghu Sharma ) ने कहा कि आयुर्वेद ( Ayurveda ) वैकल्पिक नहीं बल्कि स्थापित व कारगर चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद प्राचीन काल से संस्कृति व परंपरा का हिस्सा रही है। कोविड के दौर में भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा के सुखद परिणाम मिल रहे हैं।


शर्मा शुक्रवार को इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान के सभागार में आयोजित धनवंतरि जयंती व पंचम आयुर्वेद दिवस के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की तीनों पद्धतियों ने कोरोनाकाल में संक्रमितों को राहत पहुंचाई है। सरकार के आयुर्वेद व भारतीय चिकित्सा विभाग ने इस दौर में 31 लाख से अधिक लोगों को काढ़ा उपलब्ध कराया, वहीं गिलोय चूर्ण व अन्य औषधियों का भी वितरण किया।


आयुर्वेद मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए मेडिको टूरिज्म और औषधीय प्लांटेशन के सफल क्रियान्वयन को लेकर प्रतिबद्ध है। राजस्थान को मेडिको टूरिज्म हब बनाने के लिए 20 स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। यहां नेचुरोपैथीए पंचकर्म, योगा सहित कई पद्धतियों के सेन्टर आफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।


उन्होंने बताया कि विभाग के 3500 से अधिक औषधालयों व चिकित्सालयों में कार्मिकों ने कोरोना के दौर में सराहनीय कार्य किया है। विभाग के पांच हजार से अधिक चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों ने कोविड प्रबंधन के दौरान अन्य कोरोना वॉरियर्स के साथ बेहतरीन कार्य किया है। सरकार निकट भविष्य में मेडिकल व आर्गेनिक फॉर्मिंग पर भी विशेष ध्यान दे रही है। अन्य जिंसों की तरह औषधीय पादपों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाएगा, जिससे कि इनकी खेती को भी बढ़ावा मिल सके।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयुर्वेदिक सेवाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार नई नियुक्तियों और संस्थाओं को विकसित करने के लिए कार्य रही है। हाल ही में जोधपुर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की शुरुआत और अजमेर व जोधपुर में दो होम्यापैथी कॉलेजों की घोषणा इस दिशा में उठाए गए कदम है। ये प्रदेश के पहले सरकारी होम्यपैथी कॉलेज होंगेए जिनके निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।


मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार कोविड नेगेटिव आने के बाद भी कई घातक बीमारियां मरीज को घेर रही हैं। ऐसे में पोस्ट कोविड मैनेजमेंट में आयुर्वेद महती भूमिका निभा रहा है। सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है।


आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा विभाग के शासन सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में कोविड संक्रमितों को आयुर्वेद पद्धति से राहत दी जा रही है। इस अवसर पर निदेशक सीमा शर्मा ने भी विभाग की ओर से किए गए कार्यों के बारे में बताया। समारोह में रोग निदान एवं विकृति विज्ञान विभाग, एनआईएए जयपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कृष्ण खांडल, इंडियन मेडिसिन बोर्ड के चेयरमैन प्रोफेसर महेश चंद्र शर्मा ने भी अपनी बात कही।

समारोह में आयुर्वेद के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले कर्मचारियों और भामाशाह को सम्मानित किया गया। जिनमें डॉ. सुरेश चंद शर्मा, डॉ. विजेन्द्र कुमार शर्मा, सौरभ सिंह हाडा, डॉ. कृष्णचंद्र गौतम, डॉ. सुनील कुशवाहा, गोपाललाल मीणा, रामेश्वर दयाल शर्मा, रोहित मौर्य, भावेश गौतम, मुकेश कुमार मथुरिया, लीलू सिंह शामिल हैं।

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