कहानी-दुख की दहलीज पर

उसने दुखों को अंधेरी गली में जाते देखा, पीली रोशनी के बल्ब में चीजों के धुंधले से आकार नजर आ रहे थे। मानो भारी उथल-पुथल के बीच आकारों की नई दुनिया उभर रही हो।

By: Chand Sheikh

Published: 21 Nov 2020, 11:37 AM IST

दुख की दहलीज पर

नीतू मुकुल

वह टहलती हुई पेड़ पौधों की सुरंग नुमा गलियों से होकर गुजरी, तो उसे एहसास हुआ, जो हो चुका है उसे रोका नहीं जा सकता था। बागीचों की काली गीली दलदली मिट्टी के रास्तों से होते हुए वो, तालाब किनारे जा पहुंची। सूरज की एक किरण मकड़ी के जालों भरी शहतीर से तिरछी आ रही थी, जो सीधे पहले सीढिय़ों पर बैठी युवती पर पड़ रही थी। उसने आने की आहट सुनी तो पीछे पलट कर बोली, इधर आ जाओ, वह युवती मौन संवादों के बीच वहां आकर बैठ गई। दोनों की नजरें मिलीं और दर्द की टीस दोनों के दिमाग में घूम गई। यह दोनों कुछ समय पहले तक एक दूसरे के विपरीत थी। एक बिल्कुल अलमस्त नाजुक सी तो दूसरी एकदम होशियार और जिम्मेदार। एक हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाती तो दूसरी छोटे से छोटे काम को भी अंजाम न दे पाती। बेशक...! वो सगी बहने थीं।

किस्मत ने उनकी शादी भी एक ही घर में दो भाइयों से हो गई। बड़ी बहन शैली थी वह देवरानी बन गई और जो छोटी बहन कैरी वो जेठानी। जेठानी बनी छोटी बहन हर समय बड़ी बहन को जताने की कोशिश करती कि तुम भले ही हर काम में मुझासे बेहतर हो तो क्या हुआ, मैं तुमसे ओहदे में बड़ी हूं। बचपन की ये तकरार शादी होने पर दुश्मनी में बदल गई। लेकिन विधाता ने दोनों की किस्मत शायद एक ही कलम की स्याही से लिखी थी। बड़ा भाई यानी कैरी का पति अमरीका में डॉक्टर और छोटा भाई शैली का पति शिप पर काम करता, जिससे अक्सर कई-कई महीने बाहर रहता था।

इसी दौरान कोरोना नामक महामारी ने पैर पसार लिए। एक दिन अचानक लॉकडाउन की घोषणा हो गई। दूसरी वाली बहन अमरीका से भारत आई हुई थी। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में वो अपने पतियों के संपर्क में थी। फिर अचानक दोनों का पतियों से संपर्क नहीं हुआ। एक दिन अमरीका से फोन आया कि कैरी के पति ड्यूटी के दौरान इलाज करते हुए कोरोना से संक्रमित हो गुजर गए। कैरी को सूचना मिली, तो अलमस्त रहने वाली लड़की एकदम चुप हो गई। वह हर समय रोती रहती। उसकी बड़ी बहन शैली चाहती कि वह हालात से समझाौता करें, यूं हर वक्त रोते रहने की बजाय उनका डटकर मुकाबला करें। इसी बीच दूसरी बहन के पति के बारे में सूचना आई कि उनके शिप को समुद्री लुटेरों ने लूट लिया और खून खराबे के चलते सभी चौदह कर्मचारियों की मौत हो गई।

तालाब की सीढिय़ों पर बैठी ये दो जवान सुंदर युवतियां जो हमेशा एक दूसरे के विरुद्ध खड़ी रहीं, आज अपने अपने दुख में एक दूसरे को हिम्मत बंधा रही थीं। इस हादसे की खबर चारों तरफ शहर में फैल गई। बहुत सारे जानने वाले रिश्तेदार मिनट मिनट पर फोन करते और कहते- क्या करें हम तो मातमपुर्सी करने आना चाहते हैं। लेकिन हम लाचार हैं, इस कोरोना काल में हम आ नहीं सकते। सारे नाते रिश्तेदार फोन पर ही सारी हमदर्दी जता देना चाहते थे। दोनों बहनें अपने पतियों को याद करते हुए अकेले रहना चाहती थीं। पतियों की मौत के बाद से वह एक दूसरे की जड़ों के जुड़ाव को महसूस कर रही थीं। उन्होंने एक-दूसरे के मन को समझा और घंटों रो लेने के बाद जो शांत और जिम्मेदार बहन थी बोली, चलो घर चलते हैं, तुमने कल रात से कुछ नहीं खाया है।
नहीं मुझो घर नहीं जाना, वहां फोन की घंटी चैन से रोने भी नहीं देती है ।

इस तालाबंदी में सब सुनसान था। इंसानी वजूद से भरे रहने वाले इस पार्क के सन्नाटे को आज सिर्फ पक्षियों का कोलाहल तोड़ रहा था। घर वापस आते ही वह अपने दुखों से घिर जाती है। कमरे में मौजूद हर सामान उनकी याद दिलाते हैं। टीवी के सामने पड़ी वह आराम कुर्सियां जिन पर वह कभी बैठ कर ठहाके लगाते थे और उनकी पत्नियां उन्हें यूं हंसते मुस्कुराते देख कर खुश होती थीं। बिना उनके ये घर, घर नहीं लगता।

वापस आने पर जो भी था दोनों ने खाया और अपने अपने कमरे में सोने चली गईं। उन्होंने दरवाजों को खुला रखा क्योंकि दरवाजा बंद करने पर उन्हें अपने पतियों की और याद आने लगती। घर में एक नौकर हमेशा मौजूद रहता था लेकिन लॉकडाउन के कारण वह भी अपने गांव में फंसा था। वे दोनों उकता कर अपने-अपने फोन ज्यादातर ऑफ रखने लगीं। लेकिन उस दिन ना जाने क्या था जो छोटी बहन को सोने नहीं दे रहा था ।

वो बार-बार बेचैन होकर बैठ जाती। बेचैन होकर उठना तो रोज की बात हो गई थी, लेकिन उस दिन उसे कुछ ज्यादा याद आ रही थी और वह रोने लगी। जब मन बेहद घबरा गया तो उसने फोन ऑन कर लिया। व्हाट्स के अन-रीड ढेर सारे मैसेज ब्लिंक करने लगे। एक नंबर को देख कर वह चौंक उठी..! ऐसा कैसे हो सकता है? यह तो मेरे पति का नंबर है। मैसेज को खोला तो उसमें एक फोन नंबर था और लिखा था कि प्लीज इस नंबर पर कांटेक्ट कीजिए। मन में ढेरों सवाल लिए उसने नंबर पर डरते हुए कॉल किया। उसे लगा जरूर कोई सरकारी कार्यवाही होगी। रिंग जाते ही आवाज आई-
आप मिसेज कैरी बोल रही है?
बेहद घबराई आवाज में बोली- हां....! आपके लिए एक अच्छी खबर है जो सात लोग मृत घोषित किए गए थे उनमें आपके पति का नाम नहीं है। वो बीमार थे और दूसरे अस्पताल में भर्ती थे। एक ही नाम होने की वजह से वह गलती हो गई और वे अभी अस्पताल में भर्ती हंै, फिलहाल वह स्वस्थ है। वह जल्दी ही आपसे बात करेंगे। गुड नाइट... ये कह कहकर फोन काट दिया।

उसने दुखों को अंधेरी गली में जाते देखा, पीली रोशनी के बल्ब में चीजों के धुंधले से आकार नजर आ रहे थे। मानो भारी उथल-पुथल के बीच आकारों की नई दुनिया उभर रही हो। उसका मन खुशी से भर गया और सांस जैसे अटक गई। वो भाग कर बहन के कमरे में गई लेकिन कमरे के दरवाजे पर ठिठक गई। बेचारी शैली....।

उसने मन ही मन सोचा.. क्या उसे बताना ठीक होगा? मेरी खुशी से मेरी बहन का दुख बढ़ जाएगा। इस बात को फिलहाल अपने तक रखना ही सही होगा। वह बहन के पास जाती है, देखती है शैली चैन की नींद सोई हुई थी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। वह थोड़ा करवट लेती है चेहरे पर सजीव सी मुस्कुराहट बिखर जाती है। ऐसा लग रहा था कि शब्द फूट पड़ेंगे। मन में कितना भी दुख हो नींद उन्हें धीरे धीरे चुरा कर खुशनुमा सपनों में तब्दील कर देती है। रात काफी ढल चुकी थी। कैरी बिना कुछ बोले अपने कमरे में वापस आ जाती है।

शैली को लगता है जैसे नींद में कोई उसे जगा रहा हो। नींद की खुमारी में कैरी को जाते देखती है। सॉरी कैरी, मैं इतनी खुश हूं कि बयां करना मुश्किल है। तुम मुश्किल से हालात से समझाौता करके संभली हो। मैं नहीं चाहती तुम मेरी खुशी को महसूस करके अपने भाग्य को दोष दो मेरी बहन। फिलहाल मैं तुम्हें यह नहीं दिखा सकती हूं। वह अपनी बाईं हथेली को सीधा करके अपने मोबाइल में आए मेल को कई बार पढ़ चुकी। मेल को फिर से एक बार पढ़ती है । जिसमे लिखा होता है...
प्रिय शैली आपसे संपर्क करने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन आपका मोबाइल हमेशा बंद रहा। इसलिए मेल कर रहा हूं-जिस शिप को समुद्री लुटेरों द्वारा लूटा गया था और आशंका थी कि सभी कर्मचारी मारे गए लेकिन कुछ दिनों पहले पता चला है कि लाइफ बोट के जरिए तीन चार लोग वहां से भागने में कामयाब हो गए थे उनमें से एक आपके पति भी थे। मैंने उन्हें खुद सुरक्षित देखा है और वो जल्द ही वापस आएंगे। वह इस मैसेज को कई बार पढ़ती है फिर कैरी के पास बिस्तर पर जाकर उसके सिर को प्यार से सहलाती है, मेरी छोटी बहन मैं तुम्हें अपनी खुशी बता कर दुखी नहीं कर सकती। तभी फोन की घंटी बजती है और वह जग जाती है........।

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