Story Of 1971 India Pakistan War : दृश्य शब्दों में गढ़ते गए और ....

तीन दिसंबर 1971 का वो दिन....

वो दिन कभी नहीं भूल सकता। जब मैं बाड़मेर जिला कलेक्टर था और 27 नवंबर 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) बाड़मेर यात्रा पर पहुंची। उन्होंने उस समय ही संकेत दे दिए थे कि जल्द ही युद्ध शुरू होने वाला है। और उनकी यात्रा के ठीक 6 दिन बाद 3 दिसंबर 1971 1971 ( 1971 india pakistan war ) को भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध ( India Pakistan war ) शुरू हो गया। यह कहना है कि पूर्व आईएएस आई.सी. श्रीवास्तव का। उन्होंने पांचवे इंटरनेशनल राजस्थान स्टडीज सिम्पोजियम में सोमवार को संबोधित किया। उन्होंने सेशन में रेगिस्तानी शहर में हुए युद्ध के अनुभव शेयर किए। उन्होंने उस समय जो देखा, उसका आंखों देखी सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी आईतो उन्होंने पूछा कि क्या वे लोग शहर छोडऩा शुरू कर देंगे। तब मैंने कहा- यहां के लोगों का मनोबल काफी ऊंचा है। शहर छोडऩे की संभावना नहीं दिखती। युद्ध के दृश्यों में उन्होंने हवाई हमलों सहित कई दृश्यों को सुनाया। श्रोताओं को ऐसा लगा, जैसे युद्ध सामने ही हो रहा हो।

सवाई रामसिंह द्वितीय के चित्र
सिम्पोजियम के अन्य सत्र में सिटी पैलेस संग्रहालय की क्यूरेटर अपर्णा अंधारे ने जयपुर के महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय के बनाए तीन चित्र बताए। कहा कि वे स्वयं एक शौकीन फोटोग्राफर थे। अंधारे ने इन तस्वीरों के प्रभावों व अर्थों को बताया। इसमें महाराजा ने स्वयं को किस प्रकार एक सौंदर्यवादी, शिव भक्त व विचारक के रूप में चित्रित किया।

अजमेर दरगाह समन्वयवाद की आधारशिला
वरिष्ठ पत्रकार व वक्ता स्वाति वशिष्ठ ने 'सिंक्रेटिक ट्रेडिशंस इन राजस्थानÓ विषय पर विचार रखे। कहा कि उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की तरह भक्ति और सूफी आंदोलनों में राजस्थान में भी समन्वयवाद को बल मिला। अजमेर में सूफी संत, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह राज्य में समन्वयवाद की आधारशिलाओं में से एक है। इस सिम्पोजियम में राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक महेंद्र खडगावत भी संबोधित किया।

surendra kumar samariya Desk
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