तो क्या... पाकिस्तान की जेल में ही दम तोड देगा जयसिंह, गजानन्द और अन्य दर्जनों भाई ?

अजमेर पुलिस ने पता पूरा नहीं होने का हवाला दे लौटा दी जयसिंह की फाइल, जयपुर पुलिस ने गजानंद तो बूंदी पुलिस ने जुगराज के परिजनों को तलाशा

By: pushpendra shekhawat

Published: 07 Jun 2018, 06:00 AM IST

मुकेश शर्मा / जयपुर। न पोस्टर चस्पा किए, न ही विज्ञापन दिया, पाकिस्तान से सत्यापन के लिए आई जयसिंह की फाइल अजमेर पुलिस ने पता पूरा नहीं होने का हवाला दे वापस लौटा दी। फाइल को लौटा देने से आशंका है कि अजमेर के रहने वाले जयसिंह का पूरा जीवन अब पाकिस्तान की जेल में ही बीतेगा। जयसिंह के साथ जयपुर पुलिस के पास गजानंद और बूंदी पुलिस के पास जुगराज के संबंध में जानकारी आई थी। जयपुर पुलिस ने 50 साल पहले सामोद के महार कलां गांव छोड़ चुके गजानंद के परिजनों को ब्रह्मपुरी में तलाश लिया। वहीं बूंदी पुलिस भी जुगराज के परिजनों तक पहुंच गई।

 

निवास की पहचान के लिए मांगी जानकारी

इंटेलिजेंस ब्यूरो के सूत्रों के मुताबिक, इस वर्ष पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय कैदियों के निवास की पहचान के लिए जानकारी मांगी गई। इनमें राजस्थान के तीन कैदियों की जानकारी भी शामिल है। राजस्थान के दो कैदियों के परिजन मिल गए। लेकिन अजमेर निवासी जयसिंह पुत्र स्व. मांगीलाल निवासी बाराकोटा, बाबरी मस्जिद के पास अजमेर की पहचान नहीं हो सकी है। अजमेर पुलिस ने पता पूरा नहीं होने की कहकर फाइल 31 मई 2018 को लौटा दी है।


पाकिस्तान में बंद गजानंद: 36 साल से जी रही थी विधवा की जिंदगी

ब्रह्मपुरी में रह रही गजानंद शर्मा की पत्नी मखनी देवी ने बताया कि उन्होंने 50 साल पहले गांव छोड़ा पहले ब्यावर रहे और 40 साल पहले जयपुर आकर बस गए थे। करीब 36 साल पहले गजानंद शर्मा लापता हो गए। दो तीन साल तक कई जगह पति को तलाशा, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। बाद में परिजन थक हार कर बैठ गए और गजानंद को मृत मान लिया गया। जिसके बाद मखनी देवी विधवा की जिंदगी जीने लगी। मखनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुहार लगाई है कि सरकार प्रयास कर पति को भारत ले आए।


बूंदी के जुगराज की दिमागी हालत सही नहीं

पांच साल पहले पाकिस्तान पहुंचे जुगराज के पिता भैरों ने कहा कि उनके बेटे की दिमागी हालत सही नहीं थी। वह पाकिस्तान कैसे पहुंच गया? उनके सात बच्चों में जुगराज चौथे नंबर का है। जुगराज का पता चलने के बाद से ही उनकी आंखें बेटे की इंतजार में हैं। उनकी कौन सुनेगा?


जनाब , हम पाकिस्तान की जानकारी रखते हैं

संवाददाता ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास में भारत और साथ में राजस्थान के बंद लोगों की जानकारी के लिए फोन पर बातचीत की। कैदियों से संबंधित देखने वाले मामलों की सैल में बात कराई गई। दूतावास से बोलने वाले ने अपना नाम तो नहीं बताया, लेकिन कहा कि जनाब, हम भारत में फंसे पाकिस्तानी नागरिकों की जानकारी रखते हैं। पाकिस्तान में बंद भारतीयों की जानकारी पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास या फिर भारतीय विदेश मंत्रालय से लें।


यहां तीन दिन में लगा भारतीय दूतावास का फोन

वहीं संवाददाता ने पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास के नंबरों पर संपर्क किया, लेकिन तीन दिन बाद बुधवार शाम को दूतावास से संपर्क हो सका। यहां पर पाकिस्तान में भारतीय लोगों के मामलों को देख रही सैल में बात करवाई गई। लेकिन वहां पर तसल्ली से पूरी बात सुनी गई। लेकिन साथ में संवाददाता का मोबाइल नंबर लेकर कहा कि आपको बताने लायक कुछ हुआ तो तीन चार दिन में आपको फोन कर देंगे। फोन नहीं आए तो समझना, कुछ जानकारी नहीं है। दूतावास में बातचीत करने वाले अपना नाम नहीं बताया। दूतावास का इमरजेंसी नंबर तो लगा ही नहीं।

 

 

राजस्थान के एक दर्जन से अधिक लोग हैं पाक जेल में
सूत्रों की मानें तो राजस्थान के एक दर्जन से अधिक लोग पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। इनमें अधिकांश वे लोग हैं, जो वर्षों पहले बाड़मेर व जैसलमेर सरहद पर तारबंदी नहीं होने पर भटककर उस पार चले गए। इनमें चरवाहे और कुछ ग्रामीण लोग शामिल हैं।

 

 

केन्द्र सरकार पर टिकी आस
पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीयों को वापस लाने का काम केन्द्र सरकार का है। हमने चाही गई जानकारी उपलब्ध करा दी है, आगे भी लगातार सम्पर्क बनाए रखेंगे।

गुलाबचंद कटारिया, गृहमंत्री

 

pushpendra shekhawat Desk
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