स्ट्रीट डॉग्स को भी अपनाएं

स्ट्रीट डॉग्स को भी अपनाएं
स्ट्रीट डॉग्स को भी अपनाएं

Tasneem Khan | Updated: 11 Sep 2019, 05:55:13 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

स्ट्रीट डॉग्स को भी अपनाएं

जयपुर। डॉग लवर्स अक्सर विदेशी नस्ल लाने में रुचि दिखाते हैं। विदेशी नस्ल को वे परिवार में शामिल करने में गर्व महसूस करते हैं, जबकि देश के जो स्ट्रीट डॉग हैं, वो इन विदेशी नस्लों से कई बेहतर हैं। इंडियन पेरिआ डॉग्स जिन्हें स्ट्रीट डॉग्स के तौर पर हम जानते हैं, उन्हें भारत से ज्यादा विदेशों में पाला जा रहा है। हालांकि भारतीय भी स्ट्रीट डॉग्स आजकल पालने लगे हैं लेकिन अधिकतर विदेशियों को भारतीय कुत्तों के साथ यात्रा करते और अपने साथ ले जाते देखा जा सकता है। दरअसल भारतीयों ने इनकी कीमत नहीं समझी वरना सुंदरता और सीखने के मामले में ये कम नहीं। ये हम सब जानते हैं कि कैसे मोहल्ले कॉलोनी के ये कुत्ते सब को पहचानते...ऊंच नीच समझते हैं...अजनबी को देख भौंकते हैं। इनकी इम्यूनिटी कमाल की होती है। यह सब समझा है स्लोवेनिया की जेसिका ने। वे दिल्ली में रहकर स्ट्रीट डॉग्स की देखभाल करती हैं और एक एनजीओ के माध्यम से इन्हें अडॉप्ट करने का संदेश दे रही हैं। जेसिका की तीन साल की मेहनत के बाद अमेरिका, कनाडा और भी कई देशों में भारतीय स्ट्रीट डॉग्स को अडॉप्ट कर ले जाया जा रहा है। जबकि यहीं के लोग इन डॉग्स को स्वीकार नहीं करते। एक सर्वे के मुताबिक देश में 30 मिलियन से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स हैं। इनमें से अधिकांश सड़क पर इंफेक्शन लगने या फिर एक्सीडेंट से मर जाते हैं। जबकि इनकी देखभाल करने वाले एनजीओ बेहद कम संख्या में काम कर रहे हैं। स्ट्रीट डॉग्स को लेकर दिल्ली और आसपास के इलाकों में जागरुकता के बाद वहां के घरों में अब स्ट्रीट डॉग्स पालने का चलन बढ़ने लगा है।
पेट लवर्स भी इनको अब अपनाने लगे हैं। इतना ही नहीं बॉलीवुड में भी इन स्ट्रीट डॉग्स को अडॉप्ट किया जा रहा है। रवीना टंडन और सोनाक्षी सिन्हा अपने इन इंडियन पेट्स के साथ ही देखी जाती हैं। दरअसल हम अपने कैमिकल पॉल्युशन से भले इनको बीमार कर दें, लेकिन ये हमारी सुरक्षा को अच्छे से समझते हैं। बस जरूरत है तो इन्हें परिवार में शामिल करने की और देखभाल करने की। उसके बाद तो ये विदेशी नस्लों से भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देखते हैं। किसी भी लेब्राडोर से कहीं खूबसूरत। आपको बता दें कि अब हर शहर में डॉग रेस्क्यू सेंटर पर ये आसानी से मिल जाते हैं, जहां थोड़ी सी कागजी कार्रवाई के बाद आप इन्हें एडॉप्ट कर सकते हैं। वहीं यदि इन्हें विदेश ले जाना चाहते हैं तो एक महीने तक इनकी पशु चिकित्सकों से निगरानी और जरूरी जांचें करवानी होगी, उसके बाद ही इन्हें देश से बाहर ले जाया जा सकता है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned