प्लास्टिक के कचरे से भूमि नहीं होगी बंजर, लहलहाएंगे खेत

नवाचार: मुंबई के स्टूडेंट्स ने प्लास्टिक की बोतल से बनाया हाइड्रोपोनिक प्लांटर

By: Archana Kumawat

Published: 21 Jul 2021, 10:43 PM IST

प्लास्टिक प्रदूषण एक वैश्विक संकट है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर दिन लगभग 4,059 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। विश्व स्तर पर हर मिनट में प्लास्टिक की एक मिलियन बोतल खरीदी जाती हंै। यह खरीद वर्ष 2021 तक 20 फीसदी से भी ज्यादा हो जाएगी। दुनियाभर में पर्यावरण प्रदूषण के इस संकट को कम करने के लिए शोध किया जा रहा है। ऐसा ही एक प्रयास किया है मुंबई के यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल के १० विद्यार्थियों ने। वे प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग हाइड्रोपोनिक फार्मिंग (जलीय कृषि) में कर रहे हैं।

स्टूडेंट्स ने इस प्लांट होल्डर का प्रोटोटाइप तैयार किया है। प्रोजेक्ट हेड हेत गौर ने बताया कि हाइड्रोपोनिक खेती दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही है, लेकिन भारत में अब भी इस खेती पर ज्यादा काम नहीं किया गया है। प्लास्टिक की बोतलों के निस्तारण के लिए हमने हाइड्रोपोनिक प्लांटर बनाने का विचार किया, जिसके लिए टीम ने मुंबई और चेन्नई से एक सप्ताह में ३० किलो प्लास्टिक एकत्र किया।

कम होगा प्लास्टिक वेस्ट
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य प्लास्टिक वेस्ट और कृषि के लिए भूमि की निर्भरता को कम करना है। हाइड्रोपोनिक्स बागवानी ऐसी विधि है, जिसमें पौधे मिट्टी के बजाय पोषक तत्त्वों से भरपूर पानी में उगाए जाते हैं।

जल्द होगा खेती में प्रयोग
प्रोटोटाइप फिलहाल सजावटी पौधों के लिए है, जिसे जल्द ही सब्जियों और फलों के पौधों के लिए भी तैयार किया जाएगा। इसके लिए १५-२० किलो प्लास्टिक बोतलों का उपयोग होगा।

Archana Kumawat
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