राजनीति की दूसरी पाठशाला में कदम बढ़ाने का प्रयास करते छात्रनेता

युवा भी कर रहे टिकट की दावेदारी
एनएसयूआई ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए मांगा टिकट
परिषद के 15 से अधिक कार्यकर्ता कतार में
युवाओं को मिले नगरीय निकाय चुनाव में भागीदारी

By: Rakhi Hajela

Updated: 17 Oct 2020, 07:40 PM IST


राजनीति की दूसरी पाठशाला यानी निकाय चुनाव में छात्र नेता अपने कदम बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम के चुनाव में इस बार एबीवीपी और एनएसयूआई के कई छात्र नेताओं ने अपने टिकट की दावेदारी पेश की है। गौरतलब है कि राजधानी जयपुर में हैरिटेज और ग्रेटर दो नगर निगम बन चुके हैं जिसमें पार्षदों की 250 सीटें हो चुकी हैं इसमें से तकरीबन 10 फीसदी सीटों पर छात्रनेता दावा कर रहे हैं।

11 कार्यकर्ताओं की सूची भेजी

आपको बता दें कि निकाय चुनाव में एनएसयूआई ने अपने कार्यकर्ताओं के भी टिकट मांगा है। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष अभिषेक चौधरी और प्रभारी गुरजीत सिंह ने इस संबंध में पीसीसी प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, अजय माकन, तरुण कुमार के साथ ही काजी निजामुद्दीन को कार्यकर्ताओं की सूची सौंपी है। जिसमें एनएसयूआई प्रवक्ता रमेश भाटी सहित तकरीबन 11 कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। उनका कहना है कि युवाओं को निकाय चुनाव में वरीयता मिल सके इसे ध्यान में रखते हुए हम इन कार्यकर्ताओं के लिए टिकट मांग रहे हैं।

परिषद के पास कार्यकर्ताओं की लंबी सूची
वहीं अगर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की बात करें तो परिषद के पास भी ऐसे छात्रनेताओं की एक लंबी सूची है जो विवि और कॉलेज की छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं, इनमें से तकरीबन 15 छात्र नेता ऐसे हैं जो निकाय चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, हालांकि परिषद के अधिकांश कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं इसलिए उनका रुझान पार्षद चुनाव के स्थान पर पंच, सरपंच चुनाव की ओर अधिक रहता है लेकिन फिर भी निकाय चुनाव के लिए दावेदारों की कमी परिषद के पास नहीं है। परिषद के प्रदेशमंत्री होशियार मीणा ने कहा कि छात्र राजनीति से जुड़े परिषद के कार्यकर्ता टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। छात्र राजनीति से नगर निगम चुनाव की बात करें तो मनीष पारीक निगम में उपमहापौर रह चुके हैं वहीं अशोक लाहौटी महापौर रहे चुके हैं। आपको बता दें कि छात्र राजनीति की बात करें तो मनीष पारीक उपमहापौर रहे हैं वहीं अशोक लाहोटी महापौर रह चुके हैं।

छात्रसंघ चुनाव की संभावना नहीं
गौरतलब है कि कोरोना के चलते सरकार ने स्कूल एवं कॉलेजों की परीक्षाएं भी स्थगित कर दी और बाद में बिना परीक्षा विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को डिग्री देने से यूजीसी ने मना कर दिया है, इसके बाद परीक्षाएं करवाई गई लेकिन जिस तेजी से प्रदेश में कोरोना का संक्रमण बढ़ा है उसे देखते हुए छात्रसंघ चुनाव की संभावना नहीं के बराबर है। चुनाव नहीं होने की संभावना को देखते हुए इन छात्रनेताओं की तैयारी पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में अब यह छात्रनेता निकाय चुनाव में अपनी दावेदारी जता कर खुद को राजनीति में सक्रिय रखने का प्रयास कर रहे हैं।

Rakhi Hajela Desk
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