जकात की इतनी अहमियत-कुरआन में 32 जगह नमाज के साथ जिक्र

जयपुर शहर मुफ्ती जाकिर नोमानी ने बताई रमजान में जकात की अहमियत

By: Abrar Ahmad

Updated: 05 May 2020, 06:42 PM IST

जयपुर शहर मुफ्ती जाकिर नोमानी का कहना है कि दीने इस्लाम मे जानी इबादतों के साथ माली इबादतों का भी हुक्म दिया गया है। जकात फर्ज है। कुरआन में नमाज़ के साथ 32 जगह ज़कात को जोड़कर बयान किया गया है। मक्का में फर्ज हुई लेकिन पूर्ण नियम कायदे इस्लामी शव्वाल महीने में आए। ये हर उस बालिग मुस्लिम साहिबे निसाब पर फर्ज है, जिसके पास साढ़े 52तौला चांदी या साढ़े 7 तौला सोना या चांदी की कीमत का सामान या रूपया नकद मौजूद हो या कई चीजें थोड़ी-थोड़ी हों मगर कुल कीमत साढ़े 52तौला चांदी बनती हो। ये पूरा माल सालभर बना रहता हो तो माल में से चालीसवां हिस्सा यानी ढाई प्रतिशत निकाला जाता है। गरीबों मिस्कीनों, जरूरतमंदों व मोहताजों को दिया जाता है।

माल हो जाता है पाक
मुफ्ती ने बताया कि ज़कात अदा करने से माल पाक हो जाता है। गुनाहों से भी पाकी होती है। गरीबों से हमदर्दी होती है। आखिरत में दर्ज़े बुलन्द होते है। खुदा से ताअल्लुक़ मजबूत होता है। कुदरत की तरफ से इंसान का इम्तिहान हो जाता है। जब मोहताज़ों को हर साल ज़कात से मदद होगी तो वो गलत तरीके (चोरी, लूटमार) नही अपनाएंगे।

Abrar Ahmad Desk
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