सुजानगढ़ उपचुनावः जनता ने नहीं दिया लगातार दूसरी बार विधायक बनने का मौका

-लगातार दूसरी बार किसी को नहीं मिली जीत, दिवंगत मास्टर भंवरलाल मेघवाल भी लगातार दूसरा चुनाव जीतने में असफल रहे, सुजानगढ़ से पांच बार विधायक रहे हैं दिवंगत मास्टर भंवरलाल मेघवाल, 1951 से 1972 तक सामान्य वर्ग के लिए थी सुजानगढ़ सीट, 1977 से एससी वर्ग के लिए हुई थी आरक्षित

By: firoz shaifi

Published: 24 Mar 2021, 12:56 PM IST

फिरोज सैफी/ जयपुर।
प्रदेश में 3 सीटों सुजानगढ़, सहाड़ा और राजसमंद के लिए के लिए होने जा रहे हो उपचुनाव के लिए प्रत्याशी चयन की कवायद भाजपा और कांग्रेस में अंतिम दौर में हैं। हालांकि तीनों सीटों में से सुजानगढ़ एक बेहद दिलचस्प सीट है। एससी वर्ग के लिए रिजर्व इस सीट पर कांग्रेस दिवंगत विधायक मास्टर भंवरलाल मेघवाल के पुत्र मनोज मेघवाल को उतार कर सहानुभूति वोट लेने की तैयारी में है, लेकिन सुजानगढ़ विधानसभा सीट की बात करें तो 1951 से लेकर 2018 के विधानसभा चुनाव तक इस सीट पर हुए चुनाव बेहद दिलचस्प हुए हैं।

ये अजब ही संयोग है कि इस सीट पर लगातार दूसरी बार किसी भी जीत नहीं मिल पाई। सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1951 से लेकर 2018 तक 15 चुनाव हुए हैं लेकिन खास बात यह है कि जनता ने यहां से दूसरी बार किसी भी विधायक को चुनाव जीता कर विधानसभा नहीं भेजा। भा

जपा हो या कांग्रेस या अन्य दल से कोई भी लगातार दूसरी बार विधायक बनकर विधानसभा नहीं पहुंच पाया। दिवंगत विधायक विधायक मास्टर मेघवाल भले ही 5 बार यहां से विधायक चुने गए हो लेकिन उन्हें भी लगातार दूसरी बार चुने जाने का मौका नहीं मिल पाया। मेघवाल एक चुनाव जीते तो दूसरा चुनाव हार जाते। यही स्थिति भाजपा से जुड़े नेताओं की भी है।

1951 से 1972 तक सामान्य सीट थी सुजानगढ़
विधानसभा के पहले चुनाव 1951 से लेकर 1972 तक सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र सामान्य सीट रही है। हालांकि 1951 में हुए चुनाव में यहां निर्दलीय प्रत्याशी ने बाजी मारी थी। निर्दलीय प्रत्याशी प्रताप सिंह ने यहां कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव हराया था। इसके बाद प्रताप सिंह भी दूसरी बार चुनाव नहीं जीत पाए।

1957 में निर्दलीय प्रत्याशी शन्नो देवी ने जीत दर्ज की थी । कांग्रेस का खाता इस विधानसभा क्षेत्र में 1962 में खुला जब कांग्रेस के फूलचंद ने यहां जीत दर्ज की। इसके बाद फूलचंद भी अगला चुनाव यहां पर हार गए। हालांकि 1972 में फूलचंद को फिर से यहां जीत मिली। उसके बाद 1977 के विधानसभा चुनाव से यह सीट अजा वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई।

पांच बार विधायक रहे मेघवाल
दिवंगत मास्टर भंवर लाल मेघवाल को इस सीट पर सबसे ज्यादा पांच बार विधायक बनने का मौका मिला। हालांकि 1980 में मास्टर भंवर लाल मेघवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता। इसके बाद कांग्रेस की टिकट पर मेघवाल 1990, 1998, 2008 और 2018 के विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे।

जातीय गणित
जातिगगत समीकरणों की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में करीब पौने तीन लाख मतदाता है। यहां कुल मतदाता-274792 हैं। जिनमें पुरुष 143374 और महिला 131418 हैं। सबसे ज्यादा मतदाता यहां जाट वर्ग से 63000 हैं। दूसरे नंबर पर मेघवाल 45000, राजपूत 38,000, अल्पसंख्यक 32,000 और ब्राह्मण 30,000 हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में में यहां कांग्रेस प्रत्याशी 83632 और भाजपा प्रत्याशी को 44883 वोट मिले थे।

firoz shaifi Desk
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