दृष्टिबाधित सुनीता जला रहीं शिक्षा की ज्योत

व्यक्ति अगर ज्ञान और आत्मविश्वास से भरा हो तो चुनौतियां भी लक्ष्य प्राप्त करने में बाधक नहीं बन सकती हैं। ऐसा ही कर दिखाया है दृष्टिबाधित शिक्षिका सुनीता मोहता ने। वे नौ वर्ष की आयु में दोनों आंखों की रोशनी खो चुकी थीं, लेकिन वे बाधाओं को पार करके न सिर्फ पढ़ीं बल्कि आज सरकारी अध्यापिका भी हैं। अब वे बालिका शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।

By: Neeru Yadav

Updated: 18 Feb 2021, 10:26 PM IST

विमल छंगाणी.बीकानेर. व्यक्ति अगर ज्ञान और आत्मविश्वास से भरा हो तो चुनौतियां भी लक्ष्य प्राप्त करने में बाधक नहीं बन सकती हैं। ऐसा ही कर दिखाया है दृष्टिबाधित शिक्षिका सुनीता मोहता ने। वे नौ वर्ष की आयु में दोनों आंखों की रोशनी खो चुकी थीं, लेकिन परिवार के सहयोग व मार्गदर्शन से वे बाधाओं को पार करके न सिर्फ पढ़ीं बल्कि आज सरकारी अध्यापिका भी हैं। अब वे बालिका शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।

राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बारह गुवाड़ में अंग्रेजी व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। सुनीता की पूरी शिक्षा ब्रेल लिपि से पूरी हुई। वे अब असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए तैयारी कर रही हैं। वे बताती हैं कि स्कूल में पढ़ाने के साथ घर पर भी लड़कियों को शिक्षा देती हैं। जिस स्कूल में पढ़कर उनका जीवन बदला, उस स्कूल में वे हर वर्ष 11 हजार रुपए आर्थिक सहायता भेजती हैं। उन्होंने वहां ढाई लाख की लागत से एक कक्ष का भी निर्माण करवाया है। वे भामाशाह के रूप में सम्मानित भी हो चुकी हैं।

हर चुनौती का सामना कर आगे बढ़ी

कमी हर इंसान में होती है। कमी को दूर करना जरूरी होता है। अगर व्यक्ति के पास ज्ञान और आत्मविश्वास हो तो वह चुनौतियों पर जीत हासिल कर सकता है। मैंने भी अपनी कमी पर विजय पाई है। परिवार, और शिक्षकों के मार्गदर्शन से हर चुनौती का सामना किया और लक्ष्य की ओर अग्रसर हुई।

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