सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध चाहते हैं 78 फीसदी भारतीय

सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध चाहते हैं 78 फीसदी भारतीय
सर्वे में हुआ खुलासा
सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर आ रही है जागरुकता
प्लास्टिक के रिसाइकिलिंग को लेकर जानकारी का अभाव

By: Rakhi Hajela

Published: 03 Dec 2019, 01:36 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

मार्केट रिसर्च फर्म इप्सोस के एक नए सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि 78 प्रतिशत शहरी भारतीय सिंगल यूज प्लास्टिक के पूर्ण प्रतिबंध को लेकर ठोस कदम उठाने के पक्ष में हैं। अ थ्रोअवे वल्र्ड द चैलेंज ऑफ प्लास्टिक पैकेजिंग एंड वेस्ट नामक सर्वे के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक शहरी भारतीयों ने कहा कि वे अपने द्वारा उत्पादित पैकेजिंग के रिसाइक्लिंग और रीयूज के लिए इसे बनाने वालों को जिम्मेदार ठहराएंगे। इप्सोस इंडिया की क्लाइंट ऑफिसर नीतू बंसल ने अपने बयान में कहा, भारतीयों द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर कड़े रुख का अपनाना, सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त नियमों का असर है, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं। इस वजह से भारतीयों में व्यापक तौर पर जागरुकता और उनके व्यवहार में परिवर्तन देखा जा रहा है। हालांकि सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि प्लास्टिक के रिसाइकिलिंग को लेकर कम भारतीयों को ही जानकारी है। यह सर्वे 26 जुलाई से 9 अगस्त के बीच किया गया था, जिसमें 19 हजार 515 वयस्कों को शामिल किया गया था।
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क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक ?
सिंगल यूज प्लास्टिक एक ऐसा प्लास्टिक जिसका उपयोग हम केवल एक बार करते हैं।
एक इस्तेमाल करके फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक ही सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। हमलोग इसे डिस्पोजेबल प्‍लास्टिक भी कहते हैं।
हालांकि, इसकी रीसाइक्लिंग की जा सकती है। इसका उपयोग हम अपने रोजमर्रा के काम में करते हैं।
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कितनी खतरनाक ?
इस तरह की प्लास्टिक के अंदर जो रसायन होते हैं, उनका इंसान और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है
प्लास्टिक की वजह से मिट्टी का कटाव काफी होता है। इसके अंदर का केमिकल बारिश के पानी के साथ जलाशयों में जाता है, जो काफी खतरनाक है।

GFX- प्लास्टिक से जुड़े कुछ होश उड़ाने वाले तथ्य
दुनिया भर में हर मिनट लोग करीब 10 लाख प्लास्टिक की बोतल खरीदते हैं
जितनी प्लास्टिक इस्तेमाल होती है, उनका 91 फीसदी करीब रिसाइकल नहीं होता
हर साल दुनिया भर में करीब 40 हजार करोड़ प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल होता है
हर दिन दुनिया भर में करीब 5 लाख स्ट्रॉ का इस्तेमाल होता है।
हर दिन करीब 500 अरब प्लास्टिक के प्याले का इस्तेमाल होता है
2022 तक प्लास्टिक की खपत हो जाएगी दोगुनी
94.6 लाख टन हर साल देश में प्लास्टिक कचरा
38 लाख टन कचरा सिंगल यूज प्लास्टिक
170 करोड़ टन प्लास्टिक की सालाना खपत
26 हजार टन प्लास्टिक हर दिन निकल रहा

प्लास्टिक की वजह से 11 लाख पक्षियों की मौत
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल करीब 11 लाख समुद्री पक्षियों और जानवरों की प्लास्टिक की वजह से मौत होती है। इसके अलावा 90 फीसदी पक्षियों और मछलियों के पेट में प्लास्टिक पाई गई। दरअसल प्लास्टिक छोटे छोटे टुकड़ों में टूटकर समुद्र के अंदर रहती है। जब समुद्र के अंदर भोजन की तलाश में मछलियां और अन्य समुद्री जानवर जाते हैं तो वे गलती से इसका सेवन कर जाते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, करीब 700 समुद्री जीव प्लास्टिक प्रदूषण के कारण लुप्त होने की कगार पर हैं। अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ जानवर ही इससे प्रभावित हो रहे हैं और इसका सेवन गलती से कर जाते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है। इंग्लैंड के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की थी जिसमें यह सामने आया कि एक इंसान औसतन हर साल 70 हजार माइक्रोप्लास्टिक का सेवन कर जाता है।

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