राजस्थान में यहां शौच जाने के लिए ग्रामीणों को इस बात का सता रहा डर, जानें क्या है मामला

राजस्थान में यहां शौच जाने के लिए ग्रामीणों को इस बात का सता रहा डर

By: anandi lal

Updated: 10 Jan 2019, 08:06 PM IST

जयपुर। सरकार भले ही स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए काफी प्रयास करने में लगी है लेकिन, अब भी कई ऐसे गांव हैं जहां शौचालयों का अभाव बना हुआ है। इतना ही नहीं कई जगह लोगों को शौच के लिए रोजाना हादसों की आहट से संघर्ष करना पड़ता है। एक ऐसा ही मामला हनुमानगढ़ से निकलकर सामने आया है, जहां शौच जाने के लिए लोगों को डर सताने लगा है।

जिले के डबली राठान कस्बे के एक मोहल्ले में गुरुवार को घर के बाहर बनी धमका कुई में शौच के लिए गई बालिका पत्थर टूटने से कुई में गिर गई। घायल बालिका का शौर सुनकर पड़ौसी ने देखा तो उसने हल्ला मचाया। आवाज सुनकर परिजनों सहित स्थानीय लोगों की मौके पर भीड़ जुट गई। काफी देर तक मशक्कत के बाद चोटिल हुई बालिका को बदहाल अवस्था में कुई से बाहर निकाला गया। इस घटना के बाद से लोगों के लिए शौच जाना जी का जंजाल बन गया है। दरअसल, कस्बे के वार्ड नम्बर 23 में लक्ष्मण सिंह बावरी के घर के बाहर शौच के लिए धमका कुई बनी हुई है । लक्ष्मण सिंह की 15 वर्षीय पुत्री गुरुवार सुबह जब शौच के लिए कुई पर गई तो बैठते ही कुईं पत्थर के साथ बालिका कुई में जा धमकी।

लोगों ने बयां किया अपना दर्द

ग्रामीण मीरा बाई, बलविंदर कौर, महेंद्र कौर , भंवरी देवी ने बताया कि हमारे यहां पूरे मोहल्ले में किसी के पास भी शौचालय नहीं है। इसके चलते शौच जाने के लिए धमका कुईयां बनी हुई है, जिनमें पानी से सीलन आने से पत्थर खिसकर गिर जाते हैं। इनका प्रयोग करने से भी डर लगता है लेकिन इनका उपयोग करना हमारी मजबूरी बन गई है। वहीं लक्ष्मण सिंह, अमरपाल सिंह ,प्रीतम सिंह व सुखमंदर सिंह आदि ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत को प्रधानमंत्री शौचालय निर्माण योजना के लिए आवेदन किए एक साल से अधिक बीत गया लेकिन हमारे आवेदन पर कोई गौर नहीं गया। वहीं गुस्साए जसविंदर सिंह ने कहा कि सरकार को शौचालय निर्माण आवंटन के लिए भेदभाव नहीं करना चाहिए । गरीब जरूरतमंद को सबसे पहले इसका लाभ मिले और राशि पहले स्वीकृत होनी चाहिए, लेकिन यहां पर तो कोई हमारी परेशानी सुनने तक को तैयार नहीं है।

क्या था अभियान....और इसका लक्ष्य

2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन देशभर में व्यापक तौर पर राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में शुरू किया गया। सरकार की महत्वाकांक्षी इस योजना का उद्देश्य 2 अक्टूबर 2019 तक “स्वच्छ भारत” की परिकल्पना को साकार करने को लेकर देशभर के लोगों को खुले से शौच मुक्त, स्वच्छ और साफ बनाना था लेकिन कई जगह हालात जस के तस बने हुए हैं।

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