तालकटोरा: फिर निखार पर जयपुर का पुरावैभव

जलकुंभी हटने के बाद सामने आई उजली तस्वीर

293 साल पुराने जलाशय का झलकने लगा यौवन

By: Amit Pareek

Published: 05 Mar 2021, 11:40 PM IST

जयपुर. यदि सब कुछ ठीक रहा तो गुलाबी नगर के बीचोंबीच स्थित तालकटोरा का निखरा हुआ रूप जल्द ही नजर आएगा। पुरा महत्व के इस जलाशय को जल्द ही पर्यटन मानचित्र पर लाने की कवायद शुरू हो गई है। आमेर महल, जयगढ़, नाहरगढ़, अल्बर्ट हॉल, हवामहल की तरह तालकटोरा भी सैलानियों के लिए टूरिज्म नया डेस्टिनेशन होगा। लंबे समय से गंदगी और जलकुंभी से अटे इस तालकटोरा की हाल ही ऐसी उजली तस्वीर अखबार में दिखी जिसकी तारीफ करना लाजिमी है। जलकुंभी हटते ही तालकटोरे का छिपा हुआ सौंदर्य बाहर आ गया। तस्वीर ऐसी कि जिसने देखी उसी के मन में समा गई। एकबारगी तो यही लगा शायद वैभव लौट रहा है। तालकटोरा का इतिहास भी उतना ही पुराना है जितनी जयपुर की शान। कहते हैं महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 293 वर्ष पूर्व तालकटोरा यानी उस समय की शिकारगाह पर बैठकर ही जयपुर की इबारत लिखी थी। ऐतिहासिक अवतरणों के मुताबिक जयपुर शहर बसने से पहले तालकटोरा आमेर झील का हिस्सा था। धीरे-धीरे बसावट बढ़ती गई और झील सिमटती चली गई। तब सवाई जयसिंह ने तालकटोरा को गहरा करवाया और इसके पानी को शहर की आबादी के लिए मुहैया करवाया। यह वह दौर था जब तालकटोरा में घडिय़ाल भी रहते थे। राजे-महाराजे यहां आकर आखेट का लुत्फ उठाते। मानसून में नाहरगढ़ के नाले से बहता हुआ पानी तालकटोरा में गिरता था। यही पानी सालभर शहर के लोगों को उपलब्ध करवाया जाता था। शहर बढ़ता गया और वह झील गायब हो गई। साथ ही नाला अतिक्रमण और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ गया। पानी की आवक रुकी तो तालकटोरा भी सूख गया। वक्त के साथ सब कुछ किस्से-कहानियों में दफन हो गया। बीच में नगर निगम ने इसके वैभव को लौटाने का प्रयास भी किया था लेकिन वह कहानी भी लंबी नहीं चल पाई और तालकटोरा को बेतरतीब शहरीकरण का शिकार बना दिया गया। तस्वीर के दूसरे रुख की बात करें तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसको अब फिर से संवारा जा रहा है। बारह करोड़ की लागत से राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) तालकटोरा का स्वर्णिम काल लौटाने की कवायद में जुट गया है। आरटीडीसी के अफसरों का कहना है कि छह माह में तालकटोरा के साथ ईश्वर सिंह की छतरी शहर की पर्यटन सूची में शालि हो जाएंगे। तालकटोरा के पानी को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए साफ किया जाएगा। आस-पास घरों से निकलने वाला सीवरेज का पानी तालकटोरा में न आए इसके इंतजाम किए गए हैं। पहले जैसे फाउंटेन चलने, बोटिंग शुरू करने की भी बात कही जा रही है। तालकटोरा को ढाई हजार प्वॉइंट्स में बांटा गया है। साथ ही जलाशय से सटते मकानों पर गुलाबी रंग किया जाएगा ताकि पिंकसिटी का लुक आ सके। कुल मिलाकर तकनीक के सहारे पुरा वैभव को निखारा जा रहा है ताकि जयपुर के हैरिटेज में एक और मोती फिर से जड़ा जा सके। बेहतर सोच के साथ प्रशंसनीय शुरुआत हो चुकी है मंजिल तक योजना पहुंचे तभी असली शाबाशी है।

Amit Pareek
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