61 कैवलरी रेजिमेंट में घोड़ों की जगह टैंक लेंगे

बदलाव की तैयारी : रेजिमेंट को युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार करना चाहती है सेना

By: anoop singh

Updated: 16 May 2020, 12:23 AM IST

नई दिल्ली. दुनिया की गिनी चुनी घुड़सवार सेना में शामिल 61वीं कैवलरी रेजिमेंट अब तक भारतीय सेना की शान बढ़ाती आई है लेकिन अब इसमें बदलाव की बात चल रही है। इस रेजिमेंट में घोड़ों की जगह टैंक लगाकर इसे नियमित बख्तरबंद रेजिमेंट बनाने की तैयारी चल रही है। हालांकि सेना की इस योजना से सेना में ही काफी लोग खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि यह ऐतिहासिक परंपरा को खत्म करने जैसा है। सूत्रों के मुताबिक सेना जयपुर स्थित 61वीं कैवलरी रेजिमेंट को युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार करना चाहती है। फिलहाल इसका इस्तेमाल सिर्फ कार्यक्रमों में होता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 61 कैवलरी में घोड़ों की जगह टैंक शामिल होंगे।
वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में तीन बख्तरबंद स्क्वॉड्रन स्थित हैं और इन्हें बख्तरबंद रेजिमेंट बनाने के लिए 61 कैवलरी के तहत लाया जाएगा। इसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा, क्योंकि स्क्वॉड्रन पहले से ही टैंकों से लैस हैं। प्रत्येक स्क्वॉड्रन में 14 टैंक होते हैं।
शेकतकर समिति
रेजिमेंट को सक्रिय बख्तरबंद रेजिमेंट में बदलने का प्रस्ताव शेकतकर समिति की सिफारिशों पर आधारित है। ले. जनरल डीबी शेकतकर की अध्यक्षता में बनी समिति ने यह सुझाव दिया था।
आजादी के बाद बनी थी रेजिमेंट
साल 1947 में आजादी के बाद के वर्षों में 61 कैवलरी उस वक्त बनाई गई थी, जब रियासतों को भारत में मिलाया गया था। पूर्ववर्ती ग्वालियर लांसर्स, जोधपुर / कछवा हॉर्स और मैसूर लांसर्स को खत्म कर 1954 में 61वीं कैवलरी रेजिमेंट बनाई गई थी। अभी करीब 200 घोड़े इस सेना का हिस्सा हैं, जो दिल्ली और जयपुर में रहते हैं। सभी को दिल्ली शिफ्ट कर इनसे कोई और काम लेने के बारे में विचार किया जाएगा। 61वीं कैवलरी में बदलाव के बाद राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड ही इकलौती घुड़सवार सेना का हिस्सा रहेंगे।

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