जानिए इस वर्ष आई ऐसी टेक्नोलॉजी, जिनसे बदलेगा जीवन

जानिए इस वर्ष आई ऐसी टेक्नोलॉजी, जिनसे बदलेगा जीवन

Pushpesh Sharma | Updated: 14 Jul 2019, 08:42:03 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम की ताजा रिपोर्ट में ऐसी ही तकनीकों के बारे में बताया गया है, जो दुनिया का नक्शा बदल सकती हैं।

जयपुर.

आज हर दिन नित नई तकनीक सामने आ रही है। इनमें कुछ ऐसी हैं, जो दुनिया में बदलाव ला सकती हैं। वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम की ताजा रिपोर्ट में ऐसी ही तकनीकों के बारे में बताया गया है, जो दुनिया का नक्शा बदल सकती हैं। ऐसी ही कुछ तकनीक जो इस वर्ष चर्चा में रही-

सोशल रोबोट्स : आज रोबोट आवाज, चेहरे और भावनाओं को पहचान समझ सकते हैं। अब रोबो मित्र और सहायक के रूप में जीवन का हिस्सा बन रहे हैं। बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य कार्यों के लिए भी रोबोट की मदद ली जाने लगी है।

मैटलेंस : मोबाइल फोन, कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रयुक्त लैंस को कटिंग और कर्विंग से आकार दिया जाता है। जबकि मैटलेंस छोटा, हल्का और मौजूदा लैंस से बेहतर हैं। ये पतले लैंस मौजूदा भारी लैंस की जगह ले सकते हैं।सेंसर व चिकित्सा उपकरणों में ये बेहतर विकल्प हैं।

बेहतर उर्वरक : उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी चिंता का विषय है। इसमें अमोनिया, यूरिया और पोटाश होता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। अब नाइट्रोजन और सूक्ष्मजीवों से तैयार उर्वरक पारिस्थिति और पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल है।

नवीकरणीय ऊर्जा का भंडारण : नवीकरणीय ऊर्जा का भंडारण की चुनौती को देखते हुए आगामी दशकों में लिथियम-आयन बैटरी के जरिए इसका भंडारण किया जाएगा। इन बैटरियों के सौर ऊर्जा को शाम के वक्त अधिकतम प्रयोग के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।

टेलीप्रजेंस से बढ़ेगी करीबी : वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अब तक दूर बैठे व्यक्ति से संवाद स्थापित किया जाता है। अब ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर), 5जी नेटवर्क और एडवांस सेंसर की मिलीजुली तकनीक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में और निकटता का अनुभव होगा। इसके जरिए दूरस्थ बैठे लोगों के आप हाथ मिला सकते हैं, डॉक्टर रोगी को ठीक वैसे ही देख सकता है, जैसे उसे सामने बैठा हो।

खाद्य टै्रकिंग और पैकेजिंग : समय पर टै्रकिंग नहीं होने से पैक्ड खाना खराब होने का पता नहीं चलता। अब ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से खाद्य शृंखला के हर चरण की जांच संभव है। जिस जांच में पहले काफी वक्त लग जाात है, वह काम अब मिनटों में होने लगा है। पैकेजिंग के वक्त ही सेंसर ये संकेत दे देगा कि भोजन कब खराब हो जाएगा, इससे खाने की बर्बादी भी रुकेगी और सही खाना उपलब्ध होगा।

सुरक्षित परमाणु रिएक्टर : हालांकि परमाणु ऊर्जा कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं करती है, लेकिन रिएक्टर्स में कम जोखिम नहीं रहता। ईंधन की छड़ें गर्म हो सकती हैं और जब इन्हें पानी में मिलाया जाता है तो हाइड्रोजन पैदा होता है, जो विस्फोट का कारण बन सकता है। लेकिन नए ईंधन में ओवरहीटिंग की समस्या कम है और यदि ये गर्म होती भी हैं तो ना के बराबर हाइड्रोजन पैदा करती हैं।

रोकेंगे प्रोटीन्स के दुष्प्रभाव : खराब गुणवत्ता वाले प्रोटीन कई शारीरिक व्याधियों का कारण बन जाते हैं, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। ऐसे रोगी जिनका उपचार लंबे समय तक चलता है, इसके प्रयोग से संबंधित दवाओं के दुष्प्रभाव को रोका जा सकेगा। शरीर में अव्यवस्थित प्रोटीन कैंसर जैसी बीमारियों का कारण भी बन जाते हैं।

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