प्री-पीएचडी की कक्षाएं लेने के लिए अब दस साल का अनुभव जरूरी

यूजीसी ने जारी किया नया नियम, सैंकड़ों शिक्षक नहीं ले पाएंगे क्लास, पाठयक्रम की जिम्मेदारी अब पुराने शिक्षकों पर

By: MOHIT SHARMA

Published: 03 Jan 2020, 11:01 AM IST

जयपुर। प्री—पीएचडी के लिए अब शिक्षकों का अनुभव भी जरूरी होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों में प्री-पीएचडी कोर्स की कक्षाएं लेने के लिए शिक्षकों के दस वर्ष के शैक्षिक अनुभव को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत दो नए कोर्स रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स एवं पब्लिकेशन मिस कंडक्ट भी शामिल किए गए हैं। ये कोर्स तीस घंटे के होंगे। आयोग का यह नियम अगले सत्र से प्रभावी हो जाएगा। यूजीसी का नियम लागू होने के बाद देशभर के कई विश्वविद्यालयों के सैंकड़ों शिक्षक अगले सत्र से प्री-पीएचडी की कक्षाएं नहीं ले पाएंगे। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को यह आदेश जारी किया है।

ग्रुप डिस्कशन व प्रयोगात्मक सत्र भी
यूजीसी के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्री-पीएचडी कोर्स में कक्षा शिक्षण के अलावा ग्रुप डिस्कशन एवं प्रयोगात्मक सत्र भी अब जरूरी होंगे। इस पाठ्यक्रम में मूल्यांकन, असाइनमेंट, समूह चर्चा, कक्षा में सहभागिता एवं लिखित परीक्षा के आधार पर मूल्यांकन किए जा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को लाभ होगा।

पाठ्यक्रम की जिम्मेदारी वरिष्ठ शिक्षकों पर
यूजीसी के नियम से नए शिक्षकों को राहत मिलेगी। वरिष्ठ शिक्षकों पर प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम पूरा करने की जिम्मेदारी होगी। पीएचडी में पंजीकरण से पहले शोध छात्रों को छह माह तक पढ़ाई कर प्री-पीएचडी का पाठ्यक्रम पूरा करना होता है।

MOHIT SHARMA
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