बाजारों में छाई मुर्दानगी को दूर भगाएंगे देश के 'बागबां'

जयपुर. कोविड-19 से उपजे हालात के चलते बाजार में छाई मुर्दानगी को बागबानी न सिर्फ दूर कर सकती है बल्कि देश के बाग विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत भी करेंगे, क्योंकि कोरोना संक्रमण के भय से खाद्य वस्तुओं विशेषकर फल सब्जी का आयात पूरी तरह से ठप है।

By: Subhash Raj

Published: 29 Jun 2020, 09:18 PM IST

हिमाचल प्रदेश ने इसके लिए पहल भी शुरू कर दी है। उसने अपने बागवानों का उत्पाद मंडियों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू कर दी है। हिमाचल ने फल उत्पादकों की सुविधा के लिए एचपीएमसी ने पैकेजिंग सामग्री जैसे कार्टनस, सैपरेटर्स, ट्रे और अन्य संबंधित सामग्रियों की आपूर्ति के लिए 26 फर्में सूचीबद्ध की है। ये फर्म लगभग 1.20 करोड़ कार्टन तैयार कर चुकी है। इसके अलावा प्रदेश बागवानी विभाग ने नई दिल्ली की आजादपुर मण्डी और हरियाणा के सोनीपत की गनौर मण्डी में उत्पादकों के लिए विपणन सुविधा की व्यवस्था की है।
लगभग 1.17 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नियंत्रित वायुमण्डल भण्डार (सीए स्टोर) हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में सरकारी और निजी क्षेत्रों में चिन्हित किए गए हैं। बागवानों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से 32 हजार मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज सुविधा उपलब्ध है।
किसानों को क्लर स्प्रे के उपयोग से बचने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा, क्योंकि इससे न केवल उन्हें अपने उत्पाद की अच्छी कीमत मिलेगी और साथ ही श्रमिकों की समस्या भी हल करने में मदद मिलेगी।
मजदूरों की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए राज्य सरकार देहरादून और अन्य स्थानों तक बसें भेजने पर भी विचार करने को तैयार है। हिमाचल सरकार का कहना है कि राज्य के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा क्योंकि इस वर्ष कोविड-19 संकट के कारण अन्य देशों से सेब का आयात इस वर्ष संभव नहीं होगा।
एपीएमसी कृषि बाजार के पदाधिकारियों के आवागमन की सुविधा प्रदान करेगा और संबंधित जिला अधिकारी उन्हें ट्राजिट पास जारी करेंगे। एपीएमसी को सभी मण्डियों और व्यक्तिगत यार्डों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करना सुनिश्चित करेगा। उल्लेखनीय है कि हिमाचल केा मौजूदा सेब सीजन के दौरान लगभग 5.83 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन की उम्मीद है।

Subhash Raj
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