खाने की तलाश में राज्य में तबाही मचा रहा यह कीड़ा

खाने की तलाश में राज्य में तबाही मचा रहा यह कीड़ा
खाने की तलाश में राज्य में तबाही मचा रहा यह कीड़ा

Ashish sharma | Updated: 23 Sep 2019, 06:00:00 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Locust Attack In Rajasthan Districts : राजस्थान में पाकिस्तान से टिड्डियों की घुसपैठ जारी है। राज्य के कई जिलों में किसान इनका प्रकोप झेल रहे हैं।

जयपुर
Locust Attack In Rajasthan Districts : राजस्थान में पाकिस्तान से टिड्डियों की घुसपैठ जारी है। राज्य के कई जिलों में किसान इनका प्रकोप झेल रहे हैं। हालांकि टिड्डियां अपना भोजन तलाशने में इधर उधर उड़कर जगह जगह अपना डेरा डाल रही रही हैं लेकिन टिड्डियों की भोजन की तलाश पूरी होते ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है किसानों को। भोजन की तलाश में टिड्डियां जिस वनस्पति या खेत पर डेरा डाल देती हैं तो उसे यह चट कर जाती हैं। उधर, खेत में फसल उजड़ जाने से किसानों को सिर्फ नुकसान ही हाथ लगता है।

दरअसल, राजस्थान की अन्तरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में लगातार टिड्डियों की घुसपैठ हो रही है। यह घुसपैठ पाकिस्तान की तरफ से हो रही है। राज्य के आठ जिलों में टिड्डियों के आतंक से किसान परेशान हैं। टिड्डियां भोजन की तलाश में रोज किसी न किसी खेत पर डेरा डाल कर फसलों को चट कर रही हैं। ऐसे में किसानों की कड़ी मेहनत पसीने से खेतों में खड़ी फसल खराब हो रही है। हालांकि टिड्डी नियंत्रण दल और किसान अपने अपने स्तर पर अलग अलग तरीकों से टिड्डियों के आतंक पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं किसान परिवार बर्तन बजाकर टिड्डियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं तो कहीं नियंत्रण दल की टीमें कीटनाशकों का छिड़काव कर टिड्डियों के आतंक को कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। लेकिन कई स्थानों पर यह नियंत्रण दल पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। इस कारण भी किसानों की फसल खराब हो रही है। राज्य में पिछले करीब चार महीनों से टिड्डियों ने किसानों और नियंत्रण टीमों की नाक में दम कर रखा है। आपको बता दें कि शिशु टिड्डी का भोजन वनस्पति होती है। ये पाँच छह सप्ताह में वयस्क हो जाती है।

नए नए दल पहुंचने से परेशानी
अन्तरराष्ट्रीय बोर्डर से सटे जैसलमेर जिले के पोकरण में लगातार टिड्डियों का आतंक जारी है। स्थानीय किसानों का यह कहना है कि लगातार टिड्डियों के नए दल यहां पहुंच रहे है। कृषि विभाग की ओर से किसानों से यह कहा जा रहा है कि अगर कहीं पर भी टिड्डी आती है, तो उसकी सूचना टिड्डी नियंत्रण कक्ष में दें। आपको बता दें कि विभाग की ओर से पड़त, ओरण, गोचर व असिंचित क्षेत्रों में ही कीटनाशक का छिडक़ाव किया जाता है।
कीटनाशक का संभल कर छिड़काव
यह कीटनाशक उच्च स्तर का खतरनाक होने के कारण सिंचित क्षेत्र, खेत और नलकूपों पर छिडक़ाव नहीं किया जाता है। इस छिडक़ाव से किसी व्यक्ति या पशु के बीमार होने की आशंका बनी रहती है। इस कारण भी इस कीटनाशक का छिड़काव स्थितियों को देखकर किया जा रहा है। पोकरण के सहायक कृषि अधिकारी मदनसिंह चंपावत का कहना है कि किसानों को छिडक़ाव के लिए कीटनाशक दवाइयां ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से 50 प्रतिशत कम दर पर दी जा रही है। किसान उसे खरीदकर अपने खेतों में कृषि विभाग के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पानी के घोल में मिलाकर छिडक़ाव कर सकते है।

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