नौ दिन चले अढाई कोस

नौ दिन चले अढाई कोस

Abhishek Sharma | Publish: Feb, 03 2016 11:59:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

शिक्षा विभाग ने भी इस वर्ष नए शैक्षणिक सत्र से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा व प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन कार्य करने का प्रयोग शुरू किया था, लेकिन यह प्रयोग विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया, जिसका खमियाजा राज्य की स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को एक बार फिर उठाना पड़ेगा।

शिक्षा विभाग ने भी इस वर्ष नए शैक्षणिक सत्र से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा व प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन कार्य करने का प्रयोग शुरू किया था, लेकिन यह प्रयोग विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया, जिसका खमियाजा राज्य की स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को एक बार फिर उठाना पड़ेगा।
गौरतलब है कि राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने राज्य के छात्र-छात्राओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में उचित स्थान मिलने की सोच के चलते विद्यालयों में सीबीएसई की तर्ज पर समय बढ़ाया था, लेकिन छात्र-छात्राओं व अभिभावकों के विरोध के चलते आए दिन विभाग को संशोधित तारीख तय कर इस कैलेंडर में फेरबदल करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार ने सीबीएसई की तर्ज पर पहली बार स्कूली समय पांच की बजाय 6.30 घंटे का किया था। जिसको लेकर अगस्त माह से ही शिक्षक संगठनों सहित अभिभावकों व विद्यार्थियों का विरोध झेलना पड़ा। विभाग ने जुलाई माह में 7.15 बजे से 1.45 बजे तक तथा सितम्बर से 8.40 से 2.45 बजे तक समय बढ़ाया था, जिसका  विरोध हुआ। इससे विभाग को आधे घंटे की कटौती करनी पड़ी जो सीबीएसई बनने की राह में रोड़़ा था।
यूं बदलता रहा कैलेन्डर
शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2015-16 का प्रारम्भ एक मई से ही कर दिया था। वहीं जून के अंतिम सप्ताह में विद्यालयों का ग्रीष्म अवकाश समाप्त कर नए सिरे से विद्यालय खुले थे, लेकिन 15 जुलाई तक का समय प्रवेशोत्सव में गुजर गया।
इसके बाद समानीकरण के नाम पर एक माह तक विद्यालयों में पढ़ाई चौपट रही। इसके बाद शिक्षकों के जनगणना कार्यक्रम में जाने से पढ़ाई नहीं हो पाई। इसके चलते नवम्बर में प्रस्तावित अद्र्धवार्षिक परीक्षाएं विभाग को मजबूरन आगे बढ़ाना पड़ा। इससे राज्य के विद्यालयों में सीबीएसई की तर्ज पर पढ़ाने का अभियान पूरा नहीं हो सका।
सत्र 2015-16 में अन्तिम कार्य दिवस 31 मार्च 2016 माना गया था, लेकिन मार्च माह में बोर्ड परीक्षा व स्थानीय परीक्षाएं होने व कई विद्यालयों में परीक्षा का निर्धारित कोर्स छुट्टियों व अन्य ड्यूटियों के  चलते पूरा नहीं होने से एक बार फिर मजबूरन इस शैक्षणिक सत्र को एक मई से शुरू करने का आदेश हाल ही में जारी हुआ है। जबकि सीबीएसई विद्यालयों में एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा।
विद्यार्थियों को होगी परेशानी
राज्य शिक्षा विभाग के बार-बार शैक्षणिक कैलेंडर को संशोधित करने से एक बार फिर सरकार की नाकामयाबी साबित हो रही है। शैक्षिणक सत्र विलम्ब होने का खामियाजा प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उच्च माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को भुगतना पड़ सकता है। वहीं प्रतियोगिता परीक्षा में फार्म भरने में भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
राज्य सरकार को छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए समय व शैक्षिक कैलेंडर निर्धारित करना चाहिए। कैलेंडर निर्धारित नहीं होने से शिक्षकों व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बच्चों के सीबीएसई की तर्ज पर अध्ययन करने का सपना भी धूमिल हो रहा है।
अशोक दायमा, अध्यक्ष, शिक्षक संघ (सियाराम) चौमूं
हमने इस बार सरकारी विद्यालयों में बच्चों को इस उम्मीद पर प्रवेश दिलवाया था कि हमारे बच्चे भी सीबीएसई की तर्ज पर अध्ययन कर सकेंगे, लेकिन विभाग बार-बार आदेश जारी कर अभिभावकों के सपनों को धूमिल कर रहा है।
मुकेश कुमावत, अभिभावक, आलीसर

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