बिना स्किल के बेरोजगारों की फौज तैयार

इन्दिरा गांधी स्टेडियम में मंगलवार को आयोजित हुए रोजगार मेले में अधिकतर युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान नहीं था जो नामी कम्पनियों के प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। मेले में आए 20 हजार से अधिक युवाओं में 4 प्रतिशत ही ऐसे युवा थे जिन्हें अपने कार्य में पूर्ण दक्ष पाया गया।

इन्दिरा गांधी स्टेडियम में मंगलवार को आयोजित हुए रोजगार मेले में अधिकतर युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान नहीं था जो नामी कम्पनियों के प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। मेले में आए 20 हजार से अधिक युवाओं में 4 प्रतिशत ही ऐसे युवा थे जिन्हें अपने कार्य में पूर्ण दक्ष पाया गया।

आईटीआई जैसा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं में भी तकनीकी कौशल आशानुरूप नहीं था। यह हाल रोजगार मेले में आए युवाओं का नहीं, अलवर जिले के हजारों युवाओं का है। इससे  नियोक्ता और कामगार के मध्य दूरी बढ़ती जा रही है।

रोजगार मेले में आए नियोक्ताओं का कहना था कि यहां युवाओं को रोजगार देने में सबसे अधिक परेशानी यह आ रही है। यहां के युवा हमें वो नहीं दे पा रहे हैं जो हम उनसे चाहते हैं। बहुत से प्रशिक्षित युवाओं  को अपने कोर्स के बारे में भी पूर्ण जानकारी नहीं है और वे कार्य में भी दक्ष नहीं हैं।

ई-मेल तक नहीं कर सकते

रोजगार मेले में आए युवाओं में बहुत से ऐसे युवा थे जो ई-मेल तक नहीं कर सकते। ऐसे में उन्हें रोजगार के अवसरों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है।

ज्यादातर युवा अपने अपने ई-मेल तक ई-मित्र केन्द्रों से करवाते हैं जो एक ई-मेल का 20 रुपए से 50 रुपए तक ले लेता है। ऐसे में वे परम्परागत रोजगार के साधन व नौकरियों में आवेदन कर पा रहे हैं।

पूर्णता दक्षता नहीं होना बड़ी परेशानी

जिला रोजगार अधिकारी श्याम लाल साटोलिया ने बताया कि  अलवर जिले में 4 प्रतिशत युवा ही ऐसे हैं जो पूर्ण दक्ष हैं। ऐसे युवाओं को नौकरियों की कोई परेशानी नहीं है। वहीं यहां के युवा अच्छी नौकरी मिलने पर भी दूर नहीं जाना चाहता। वह अलवर शहर के समीप ही नौकरी करना चाहता है।

अलवर जिले के युवा इको फ्रेंडली नहीं है जिसका खामियाजा उसे उठाना पड़ रहा है। यहां के बहुत से युवा आईटीआई व पॉलिटेक्निक जैसे कोर्स करते हैं, लेकिन प्रशिक्षण देने वाले संस्थान की गुणवत्ता नहीं है तो उसका प्रभाव विद्यार्थी पर पड़ता है। एेसे संस्थान में वह पूर्ण दक्षता प्राप्त नहीं कर सकता है।
The number of unemployed ready without skill

कौशल का अभाव सबसे बड़ी कमी

अनुबंध रॉय एक्सपर्ट व्यक्तित्व विकास ने बताया कि वर्तमान में यह  बहुत बड़ी समस्या बन गई है कि युवा पढ़ाई तो पूरी कर लेता है और वह अपने आपको उस पोस्ट के योग्य मानता है लेकिन नियोक्ता उससे जो उम्मीद करता है, वह स्किल उसमें नहीं होती।

एक स्किल पढ़ाई से आती है और दूसरी सॉफ्ट स्किल होती है। दूसरी स्किल अपने  परिवार और समाज से आती है। हम जिन चीजों को छोटी मानते हैं वह हमारे व्यक्तित्व का विकास करते हैं।

उन्होंने बताया कि बड़े शहरों के युवाओं में यह दिक्कत नहीं आती है जबकि अलवर जिले के युवाओं को गैर सरकारी संस्थानों में अच्छी नौकरी पाने में परेशानी होती है। यह व्यक्तित्व विकास की शिक्षा पाठ्यक्रम से नहीं मिल सकती है। वर्तमान में बहुत से युवाओं को यह पता ही नहीं रहता है कि उन्हें क्या करना है?

वे प्रारम्भ में सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। सरकारी नौकरी नही मिलने पर गैर सरकारी संस्थानों में नौकरी का प्रयास करते हैं। ऐसे में उसे सफलता नहीं मिल पाती।

युवाओं को वर्तमान में सरकारी नौकरियों के पीछे भागने की बजाए अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए। ऐसे में नौकरियों की कोई कमी नहीं रहेगी। यही नहीं युवा अपने स्तर पर व्यवसाय भी प्रारम्भ कर सकते हैं। युवाओं में स्किल डवलपमेंट के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास और तेज होने चाहिए।
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