न्यायालय आदेश के बावजूद बंदी को नही किया रिहा

राजस्थान उच्च न्यायालय ने गृह सचिव, दौसा जिला कलेक्टर सहित 4 अधिकारियों पर लगाया एक लाख रुपए हर्जाना

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 09 Jul 2020, 09:11 PM IST

जयपुर।


आदेश के बाद भी बंदी को पैरोल पर रिहा नहीं करने पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने गृह सचिव, जिला कलेक्टर दौसा, जेल डीआइजी सहित चार अधिकारियों पर एक लाख रुपए हर्जाना लगाया है। न्यायालय ने हर्जाना राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलकर बंदी को देने के आदेश दिए हैं।

दौसा जेल में बंद अशोक कुमार प्रजापत ने पैरोल के लिए न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिस पर न्यायालय ने 21 मई को पैरोल याचिका स्वीकार कर रिहा करने के आदेश दिए थे। इस संबंध में प्रजापत ने आवश्यक सभी औपचारिकता भी पूरी कर दी। इसके बाद भी प्रजापत को जेल से रिहा नहीं किया गया। अदालती आदेश के बाद भी जेल से रिहा नहीं करने पर प्रजापत ने अवमानना याचिका दायर की। जिसके बाद प्रजापत को 8 मई को रिहा कर दिया। बंदी के अधिवक्ता विश्राम प्रजापती ने न्यायालय को बताया कि अवमानना याचिका दायर होने की जानकारी मिलने के बाद बंदी को रिहा किया गया है। जिस पर न्यायाधीश एसपी शर्मा ने कहा कि अदालती आदेश के बावजूद डेढ माह तक अशोक कुमार को अवैध हिरासत में रखना न्यायिक अवमानना है। इसके लिए न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव, गृह विभाग के उपसचिव, जेल डीआईजी और दौसा जिला कलेक्टर पर एक लाख की हर्जाना लगाने के आदेश दिए। इस हर्जाना राशि को जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलकर बंदी को दिया जाएगा।

KAMLESH AGARWAL Desk
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