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Environment : ग्लोबल वार्मिंग बढ़ा रही अरावली पर्वतमाला का तापमान

ग्लोबल वार्मिंग का अरावली पर्वतमाला पर असर दिखने लगा है। वनस्पति-औषधीय पौधों की कमी, अंधाधुंध खनन और भीषण गर्मी के चलते यहां तापमान बढ़ने लगा है। 40 साल पहले तक 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहने वाला अरावली पर्वत का तापमान अब 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इससे टकराने वाली हवाएं भी जल्द ठंडी नहीं हो रही हैं।

जयपुर

Published: June 05, 2022 03:07:06 pm

ग्लोबल वार्मिंग का अरावली पर्वतमाला पर असर दिखने लगा है। वनस्पति-औषधीय पौधों की कमी, अंधाधुंध खनन और भीषण गर्मी के चलते यहां तापमान बढ़ने लगा है। 40 साल पहले तक 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहने वाला अरावली पर्वत का तापमान अब 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इससे टकराने वाली हवाएं भी जल्द ठंडी नहीं हो रही हैं।
plants in aravali hills
plants in aravali hills
मैदानी इलाकों पर यह असर

  • 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया शहरों का तापमान
  • पहाड़ से टकराकर हवाएं नहीं हो रहीं जल्द ठंडी
  • पुष्क में अरावली क्षेत्र से लुप्त हुआ लूणी नदी का उद्गम स्थल
  • अजमेर, पुष्कर, नागौर, जैसलमेर, बीकानेर जिले में बढ़ रहा रेगिस्तान
  • सदियों पुरानी जैव विविधता और वनस्पति में कमी
  • अरावली पहाड़ पर अवैध कब्जे और बेरोकटोक खनन
...ऐसा है महत्व
वज्रदंती: टूथपेस्ट में उपयोग होता है। मानव के दांतों के साथ अरावली के पत्थरों को मजबूत रखती है।
बापची: इसकी दवा दिमाग को ठंडा रखती है। इसके फल को रातभर पानी में भिगोने के बाद सुबह दूध के साथ प्रयोग में लिया जाता है। यह अरावली में ठंडक बनाए रखती है।

गुल-ए-बनफशा: मनुष्य के दिमाग और शरीर में गर्मी तथा अरावली के पत्थरों को जल्द ठंडा करने में सहायक।
बहेड़ा: पेट के लिए त्रिफला चूर्ण और अरावली की अन्य औषधियों को खराब होने से बचाती है।

करील: स्वादिष्ट अचार-मुरब्बा बनाने में उपयोग।

अभी मौजूद हैं यह पौधे
औषधीय- खरणी, कुमठा, अमलताश, आंवला, तुलसी, बेल, करील, गुलर, बहेड़ा देसी बबूल, खैर, एरूंज, धोकड़ा, जूली फ्लोरा, नीम, खेजड़ी चुरैल, करंज, कचनार और अन्य।
झाड़ी प्रजाति- डासण, गागण, बेर, पियागण, खरेणा,वज्रदंती, थोर, गुल ए बनफशा।

वृक्ष- खेजड़ी (राज्य वृक्ष), पीपल, नीम और अन्य।

प्रदेश के इन इलाकों में फैलाव

राजस्थान में अजमेर, उदयपुर, जयपुर, सिरोही, माउन्ट आबू, राजसमंद, अलवर और अन्य जिलों में अरावली पर्वतमाला सबसे विस्तृत है। यह करीब 692 किलोमीटर क्षेेत्र में फैली हुई है। अजमेर शहर और जिले में अरावली चेन शास्त्री नगर, कोटड़ा, सराधना, तारागढ़, पुष्कर-नाग पहाड, घूघरा घाटी, बीर, दांता, जतिया, सरवाड़, भिनाय, नसीराबाद, किशनगढ़, नूरियावास और ब्यावर के विभिन्न हिस्सों में नजर आती है। इसमें कई औषधीय पौधों का खजाना है। इनसे आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनती हैं।
औषधीय महत्व के पौधों की 2 हजार किस्में विलुप्त

औषधीय पौधे और वनस्पति अरावली के तापमान को नियंत्रित करते रहे हैं। पत्थरों को मजबूत रखने, तेज गर्मी के बाद त्वरित ठंडा करने तथा छोटे-मोटे पौधों को खराब होने से बचाती रही हैं। इनके बने रहने से जीव-जंतुओं का भी पोषण होता है। खासतौर पर वानर, हिरण, पैंथर, भालू और अन्य वन्य जीवों को आवास एवं भोजन उपलब्ध होता है। लेकिन पिछले 20-25 साल में हालात बदल गए हैं। मदस विवि के शोध के मुताबिक अरावली क्षेत्र से करीब 2 हजार किस्म की वनस्पति विलुप्त हो चुकी हैं। इससे बंजर हुए पहाड़ तपने लगे हैं।
ग्लोबल वार्मिंग का असर

80 के दशक तक अरावली का तापमान ग्रीष्म काल में 15 से 20 डिग्री सेल्सियस और शीतकाल में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक रहता था। लेकिन चालीस साल में हालात बदल गए हैं। अब अजमेर सहित जयपुर, सिरोही, राजसमंद, अलवर और अन्य जिलों में अरावली का सामान्य तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक रहने लगा है। कम बरसात से पहाड़ी इलाके में बहने वाले कई झरने बंद हो चुके हैं।

इनका कहना है

अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल को बढ़ने से रोकने के अलावा प्रकृति और जैव विविधता की संरक्षक है। खनन, कम बरसात और वनस्पति में कमी से इसका तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यह अच्छे संकेत नहीं हैं। 50 साल में अरावली का काफी दोहन हो चुका है। समय रहते नहीं संभले तो विश्व की प्राचीनतम पर्वतमाला खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगी।
डॉ. मिलन यादव, भूगोल विभागाध्यक्ष, एसपीसी-जीसीए

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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