ये दो विभाग रोडे नहीं बन जाएं किसानों की कर्जमाफी में

ये दो विभाग रोडे नहीं बन जाएं किसानों की कर्जमाफी में

PUNEET SHARMA | Updated: 21 Jun 2018, 10:31:05 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

ये दो विभाग रोडे नहीं बन जाएं किसानों की कर्जमाफी में

ये दो विभाग रोडे नहीं बन जाएं किसानों की कर्जमाफी में
जयपुर।
मुख्यमंत्री की ओर से विधान सभा में राजस्थान के 20 लाख किसानों की कर्जमाफी के लिए लग रहे शिविर अटक सकते है। क्योंकि कर्जमाफी के लिए सहकारिता विभाग की ओर से लिए जा रहे 5 हजार करोड की लोन गारंटी की शर्तों वाली पत्रावली पर सहकारिता विभाग और वित्त विभाग में शीतयुदद चल रहा है। अब वित्त विभााग ने लोन गांरटी की पत्रावली को यह कह कर लौैटा दिया है कि जो फार्मेट तैयार किया है वह आधा अधूर तैयार किया है और ऐसे फार्मेट पर सरकार लोन की गारंटी नहीं दे सकती है।


मुख्यमंत्री की 20 लाख किसानों की कर्जमाफी को लेकर सहकारिता विभाग और वित्त विभाग दस हजार करोड रुपए के जुगाड में लगे हुए है। कई श्रेणियों के किसान इस कर्जमाफी से बाहर होने के बाद अब कर्जमाफी के लिए 8 हजार करोड रुपए की जरूरत है। इनमें से आधा आधा हिस्सा सरकार और सहकारिता विभाग वहन करेंगे।


कर्जमाफी के लिए सहकारिता विभाग अलग अलग बैंकों से कर्ज लेने के लिए तभी राजी हुआ जब वित्त विभाग ने इस कर्ज की गारंटी देने का वायदा किया। बीते दिनों सहकारिता विभाग ने बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज के लिए वित्त विभाग की गारंटी के लिए वित्त विभाग की ओर से एक फार्मेट दिया गया था। इस फार्मेट को सहकारिता विभाग ने वित्त विभाग भेजा तो वित्त विभाग के अफसरों ने फार्मेट केा यह कह कर लौटा दिया कि फार्मेट आधा अधूरा भर कर भेजा गया है। ऐसे फार्मेट पर कर्ज की गारंटी वित्त विभाग की ओर से नहीं दी जा सकती है।


उधर प्रदेश में सहकारिता विभाग की ओर से कर्जमाफी के शिविर भी शुरू हो चुके हैं । इनमें किसानों केा कर्जमाफी के सर्टिफिकेट दिए जा रहे है। लेकिन वित्त विभाग और सहकारिता विभाग के बीच कर्ज गारंटी को लेकर चल रहे शीतयुदद के कारण अगर सहकारिता विभाग कर्ज नहीं ले पाता है है तो कर्जमाफी अटक सकती है।


हांलाकि यह भी कहा जा रहा है कि सहकारिता विभाग खुद ही किसानों की कर्ज माफी के लिए विभिन्न बैंकों से कर्ज लेने से पीछे हट रहा है। क्योंकि सरकार पहले ही किसानों लगान को माफ कर चुकी है। ऐसे में सहकारिता विभाग के पास पहले ही राजस्व की कमी है।

 

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