निकाय चुनाव: इस बार मोबाइल से लगेगी नैया पार

कोरोना का असर दिख रहा चुनावी रंगत पर, गहमागहमी-धूम-धड़ाका गायब, मोबाइल के जरिए उम्मीदवार कर रहे प्रचार

By: Amit Pareek

Published: 23 Oct 2020, 10:33 PM IST

जयपुर. नगर निगम चुनाव से इस बार गहमागहमी, धूम-धड़ाका गायब है। शहर के कई वार्डों में घूमकर देखा तो ऐसे ही संकेत मिले। स्पष्ट है कोरोना ने हमारी दिनचर्या पर ही प्रभाव नहीं डाला बल्कि चुनाव के रंग ढंग भी बदल दिए। अब चुनाव सड़क पर नहीं 6.5 इंच की स्क्रीन पर लड़ा जा रहा है। वहीं से मैदान मारने की कवायद शुरू हो गई है। मतदाता भी संक्रमण के खतरों को देखते हुए भीड़भाड़, वार्ड प्रत्याशियों से दूरी में ही भलाई समझ रहे हैं। ऐसे में अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाना प्रत्याशियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन इसका भी उन्होंने हल खोज लिया है। हथेली में समाने वाले छोटे से मोबाइल को ही इस बार चुनाव में ब्रह्म बना लिया गया है। इसी के जरिए शब्द बाण छोड़े जा रहे हैं। भावी योजनाएं साझा की जा रही हैं। पार्षद क्यों बनना चाहते हैं? जीतकर क्या कुछ करेंगे? अब तक इलाके के लिए क्या किया ये सब बातें धीरे-धीरे मोबाइल के जरिए वार्ड के घर-घर भेजी जा रही हैं। संक्रमण जिस तेजी से फैल रहा है उसमें प्रत्याशी भी जान चुके हैं कि वोटर्स पर यदि पकड़ मजबूत बनानी है तो डिजिटल प्लेटफॉर्म से ही गुजरना होगा। चूंकि हर गली, हर सड़क इन्हीं सोशल-डिजिटल माध्यम से होकर निकलती है ऐसे में प्रत्याशियों ने अपनी सक्रियता यहीं पर दिखाना शुरू कर दिया है।

संपर्क, संवाद, संदेश सब कुछ हुआ संभव
जानकारी के अनुसार दिन में चुनाव प्रचार की शुरुआत हो या फिर देर रात तक रणनीति बनाने की कवायद दोनों में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग महत्वपूर्ण होती जा रही है। प्रत्याशी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए हैं। इसी के बूते वोटर्स से परिचय किया जा रहा है। व्हाट्सऐप संदेशों से वार्ड के बारे में विस्तृत जानकारी मुहैया करवाई जा रही है। प्रत्याशी अपना विजन, जनसेवा से जुड़े कार्यों के वीडियो भी इसी पर शेयर कर रहे हैं। बहुत से प्रत्याशी तो जनसंपर्क कार्यक्रमों का एफबी पर लाइव भी कर रहे हैं ताकि वार्ड के अन्य लोग भी इससे जुड़ सकें।

मोबाइल पर ही खोला मोर्चा
इस बार निकाय चुनाव में युवा वोटर्स सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं और उन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए मोबाइल ही एकमात्र जरिया नजर आ रहा है जिसे भावी पार्षद गंवाना नहीं चाहते। प्रचार ही नहीं विरोध में भी मोबाइल की भूमिका अहम हो गई है। जिन लोगों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया या जो किसी कारण से चुनाव रणभूमि में उतर नहीं पाए उन्होंने अब वर्तमान प्रत्याशियों के खिलाफ मोबाइल से ही मोर्चा खोल दिया है। इसी से आग उगली जा रही है। एफबी, व्हाट्सऐप पर भी जमकर बखिया उधेड़ रहे हैं।

Amit Pareek Desk
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