इस बार एक ही देख सकेंगे राजस्थान विश्वविद्यालय में गुलदाउदी के फूलों की प्रदर्शनी

बुधवार शाम 4 बजे होगा प्रदर्शनी की उद्घाटन

By: HIMANSHU SHARMA

Updated: 03 Dec 2019, 10:31 AM IST



जयपुर
राजस्थान विश्वविद्यालय की नर्सरी में हर साल लगने वाली गुलदाउदी के फुलों को हर बार सभी को खासा इंतजार रहता हैं। लेकिन इस बार गुलदाउदी के फूलों को सिर्फ एक दिन तक ही निहारा जा सकेगा। वहीं गुलदाउदी के फुल खरीदने के लिए गुलदाउदी के फूल प्रेमियों को सिर्फ पांच घंटे ही मिलेंगे। हालांकि राजस्थान विश्वविद्यालय में इस वर्ष लगने वाली गुलदाउदी के फुलों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कल शाम चार बजे होगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि सचिव उच्च शिक्षा शुचि शर्मा करेगी। जिसके बाद पांच दिसम्बर से आमजन के लिए गुलदाउदी के फुलों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। जिसमें आमजन सिर्फ एक दिन तक रंग बिरंगे फूलों को प्रदर्शनी को आकर निहार सकेंगे। वहीं इसके बाद इन्हें खरीदने के लिए आमजन को सिर्फ पांच घंटे मिलेंगे। जिसमें छह दिसम्बर को लोग सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक फूलों को खरीद सकेंगे। इस बार प्रदर्शनी में छह वैरायटी की गुलदाउदी के फूल तैयार किए गए हैं।
3200 गमले बिक्री के लिए
राजस्थान विश्वविद्यालय की नर्सरी में इस बार 3200 गमले बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। जिसमें 6 ग्रुप में 50 वैरायटी के गुलदाउदी के रंग बिरंगे फूल देखने को मिलेंगे। नर्सरी में ही तैयार की गई गुलदाउदी में इनक्वर्ड, रिफलेक्स, स्पाइडर, पोम, बटन, गोल्डन, कोरियन सिंगल और डबल किस्म के पौधे हैं। इस बार गुलदाउदी के एक पौधे की कीमत 100 रुपए रखी गई है।
1986 से लगाई जा रही प्रदर्शनी
राजस्थान विश्वविद्यालय में लगने वाली इस प्रदर्शनी को लेकर आमजन में खासा उत्साह रहता है। क्योकि यहां के फूलों की क्वालिटी बहुत ही शानदार होती हैं। विश्वविद्यालय की नर्सरी में यही प्रदर्शनी सन् 1986 से लगाई जा रही हैं। गार्डन इंचार्ज डॉ.रामवतार शर्मा ने बताया कि संसाधान कम होने के कारण कम ही गमले तैयार कर पा रहे हैं। बल्कि डिमांड हर बार बहुत ज्यादा रहती हैं। यही कारण है कि सिर्फ पांच घंटे ही बिक्री के लिए रखे गए हैं। लेकिन हर बार हालात यह होती है कि शुरुआती घंटों में ही सारे पौधे बिक जाते हैं।
ऐसे तैयार होता है गुलदाऊदी
डॉ.रामवतार ने बताया कि पहले मदर प्लांट को क्यारियों में लगाया जाता है। मदर प्लांट को मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह लगाया जाता है। 20 से 25 दिनों में इसमें जड़ें आती हैं। जड़ें आने के बाद जून के अंतिम या जुलाई के पहले सप्ताह से इसे गमलों में लगाया जाता है। मदर प्लांट के बढ़ जाने के बाद कटिंग की जाती है। कटिंग किए गए 100 से 150 डंठलों को एक साथ बंडल बनाकर रेत में लगाया जाता है।जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है। इनकी तीन बार कटिंग की जाती है। जब इनके डंठल मोटे और मजबूत हो जाते हैं जो चौथी कटिंग के बाद उन्हें रेत में लगाते हैं। इसे रेत में 21 दिनों तक रखा जाता है। जिसके बाद यह नवम्बर अंत तक तैयार हो जाती हैं।

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