उच्च न्यायालय के तीन फैसले...मिली राहत

होमगार्ड भर्ती के लिए एक पद खाली रखें

छात्रावास अधीक्षकों से की जा रही वसूली पर रोक

विश्वविद्यालय के कर्मचारी को राहत

By: KAMLESH AGARWAL

Updated: 18 Apr 2020, 10:23 PM IST


होमगार्ड भर्ती के लिए एक पद खाली रखें
मुकुट बिहारी के अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा ने बताया कि प्रार्थी 1994 से होमगार्ड के पद पर निरंतर सेवाएं दे रहा है। लेकिन गृह रक्षा विभाग ने 17 दिसंबर 2019 के आदेश से उसे 1992 में एक मामले में हुई एक साल की सजा का हवाला देते हुए पद से हटा दिया। याचिकाकर्ता ने कहा कि गृह रक्षा विभाग ने जिस मामले में उसे एक साल की सजा होना बताया है उसमें तो परीवीक्षा का लाभ दिया था। इसलिए उसे बांरा जिले की होमगार्ड भर्ती में शामिल कर नियुक्ति दी जाए। जिस पर न्यायाधीश एके गौड़ ने एक पद रिक्त रखते हुए जवाब तलब किया है।

छात्रावास अधीक्षकों से की जा रही वसूली पर रोक

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन चल रहे छात्रावासों के अधीक्षकों की एसीपी में संशोधन कर निकाली रिकवरी पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रमुख वित्त सचिव और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आयुक्त और अतिरिक्त निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अधिवक्ता सीपी शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता छात्रावास अधीक्षकों 2400 रुपए की ग्रेड पे दी जा रही थी। वित्त विभाग ने तीस अक्टूबर 2017 को एक अधिसूचना जारी कर नौ साल की सेवा पर 2400 सौ रुपए की एसीपी और 18 साल की सेवा के बाद 2800 रुपए की एसीपी का प्रावधान कर दिया। इसी के साथ इस अवधि में दी गई अधिक राशि की रिकवरी निकाल दी। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने रिकवरी पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

विश्वविद्यालय के कर्मचारी को राहत
याचिकाकर्ता ओमप्रकाश के अधिवक्ता हितेश बागड़ी ने बताया कि ओमप्रकाश की सेवानिवृत्ति 2026 में होनी है। लेकिन विश्वविद्यालय ने 2020 मेंं सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की 11 दिसंबर 2019 को जारी लिस्ट में उसक नाम भी शामिल कर लिया। इस संबंध में विश्वविद्यालय को प्रतिवेदन भी दिया लेकिन उसका नाम सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की लिस्ट में से नहीं हटाया। दरअसल एक प्रशासनिक आदेश में प्रार्थी की जन्मतिथि को 1966 की बजाय गलती से 1960 कर दिया है। जबकि पे-स्लिप, एसीआर व अन्य दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि 1966 व सेवानिवृत्ति की तारीख 2026 ही है। प्रार्थी एक पैर से विकलांग है और ऐसे में उसे जबरन सेवानिवृत्त करना अन्यायपूर्ण है। जिस पर न्यायाधीश एसपी शर्मा ने विश्वविद्यालय एवं अन्य को नोटिस जारी करते हुूए सेवानिवृत्ति को याचिका के आदेश के अधीन रखा है।

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KAMLESH AGARWAL Desk
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