रिश्तेदारों और चहेतों को नौकरी देना पड़ा भारी, तीन पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

कुल 56 लोगों को दी नौकरी, जिनमें से 25 के दस्तावेज पाए गए फर्जी

By: Mridula Sharma

Published: 20 Jul 2018, 09:27 AM IST

जयपुर. फर्जी तरीके से रिश्तेदारों और चेहतों को नौकरी देने के मामले में एसीबी ने स्वास्थ्य विभाग के 3 पूर्व अधिकारियों सहित 5 जनों को गिरफ्तार किया है। कुल 56 लोगों को नौकरी दी गई, जिनमें से 25 के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। मामले में आइएएस नीरज के. पवन भी आरोपी हैं, जिन्हें एसीबी ने कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस दिया है। पवन के खिलाफ अभियोजन के लिए आइपीसी की धाराओं को लेकर राज्य सरकार इजाजत दे चुकी है और पीसी एक्ट को लेकर मामला केन्द्र में लम्बित है।
मामला राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ा है। इसके तहत वर्ष 2014-15 के लिए 6 जिलों में 7 पदों पर भर्ती करनी थी। हर जिले में मनोरोग विशेषज्ञ, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, साइकेट्रिक सोशल वर्कर, साइकेट्रिक नर्स, मॉनिटरिंग एंड ई-वैल्यूवेशन ऑफिसर, केस हिस्ट्री असिस्टेंट व कम्यूनिटी नर्स भर्ती होने थे। कार्मिक उपलब्ध कराने के लिए सुनीत की दीक्षित कम्प्यूटर कम्पनी का चयन हुआ था। आरोप है कि कम्पनी का चयन फर्जी तरीके से हुआ। इसके बाद फर्जी व कमतर डिग्रियों के आधार पर नाते-रिश्तेदारों को हजारों रुपए महीने की नौकरियां दे दी गईं।

अन्य अभियुक्तों की तलाश
मामला खुलने का डर सताया तो तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की नोटिंग ही बदल दी गई। नोडल ऑफिसर रामअवतार जायसवाल सहित अन्य अभियुक्तों की तलाश है। नौकरी पाने वालों में रामअवतार के भाई की पत्नी नीरज जायसवाल, बीआर मीना का भाई व अन्य लोग शामिल थे। कार्मिक उपलब्ध कराने वाली फर्म के सुनीत ने भी पत्नी को नौकरी पर लगवा दिया था। उन्हीं को आरोपी बनाया है, जिनके दस्तावेज फर्जी पाए गए।

आईएएस नीरज के. पवन पवन के घर पहुंची एसीबी
एनआरएचएम घोटाले में जेल जा चुके नीरज के. पवन को एसीबी ने इस मामले में भी आरोपी माना है। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति लेने के लिए गत वर्ष ही सरकार को पत्र लिखा दिया था। राज्य सरकार की ओर से इजाजत देने के बाद नीरज ने इस पर पुनर्विचार के लिए प्रतिवेदन दिया है। उसमें लिखा है कि मामला उनके पास फर्म के चयन तक ही लम्बित था। अन्य पूरी प्रक्रिया में वह शामिल नहीं थे। एसीबी गुरुवार को प्रतापनगर स्थित उनके घर पहुंची तो पवन ने यही जानकारी दी। इस पर जांच अधिकारी हेमाराम ने सम्बंधित दस्तावेज के साथ उन्हें कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस दिया। पवन ने गुरुवार को ही फिर मुख्य सचिव को प्रतिवेदन दिया है। दोपहर बाद कार्मिक विभाग का पत्र एसीबी को मिला है, जिसमें बताया है कि पवन के खिलाफ अभियोजन की इजाजत देने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

इन्हें किया गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व निदेशक जन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग बीआर मीना, पूर्व सहायक लेखाधिकारी बुद्धिप्रकाश, पूर्व सांख्यिकी अधिकारी राजेेन्द्र शर्मा, कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली फर्म का संचालक सुनीत दीक्षित तथा नीरज जायसवाल शामिल है।

Mridula Sharma Reporting
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