एक टाइगर ऐसा भी, जिसने सैंकड़ो मील का किया सफर

Tiger C1 : देश में एक टाइगर ऐसा भी है जिसने महज ही कुछ महीने में सैंकड़ों मील का सफर तय कर लिया।

जयपुर

Tiger C1 : देश में एक टाइगर ऐसा भी है जिसने महज ही कुछ महीने में सैंकड़ों मील का सफर तय कर लिया। ऐसा करने वाला यह भारत का संभवतया सबसे लंबा सफर तय करने वाला पहला बाघ बन गया है। यह टाइगर कई जंगलों का सफर तय करता हुआ किसी चीज की तलाश कर रहा है। जानकारों का कहना है कि ये टाइगर या तो अपनी टेरेटिरी की तलाश कर रहा है, या फिर अनुकूल क्षेत्र के साथ ही अपने लिए किसी साथी की। इस टाइगर के इस लंबे सफर की अन्य कोई वजह भी हो सकती हैं। दरअसल, इस टाइगर के इस तय किए गए सफर को रिकॉर्ड किया है टाइगर में लगाए गए रेडियो कॉलर में। इसी के जरिए उसे पिछले कई महीनों से ट्रेक करके उसकी एक्टिविटी पर नजर रखी जा रही है। यह टाइगर करीब 807 मील यानी 1300 किलोमीटर का सफर तय कर चुका है। जंगलों में घूमते हुए उसके यह सफर करीब पांच महीने में पूरा किया है। इस टाइगर की उम्र सिर्फ ढाई साल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ढाई साल का यह टाइगर शायद अपने अनुकूल क्षेत्र, साथी या फिर शिकार की तलाश में है। इस टाइगर के गर्दन में लगा रेडियो कॉलर के डेटा के मुताबिक यह जून के महीने में महाराष्ट्र के एक वन्यजीव अभयारण्य से निकला था। उसके बाद से उसे ट्रैक किया जा रहा है। 807 मील के इस लंबे सफर के दौरान यह टाइगर जंगलों के साथ ही खेतों, पानी, राज्यमार्गों और पड़ोसी राज्यों से होकर गुजरा।

एक बार हो चुकी है भिड़ंत
इस बीच एक दफ़ा सकी भिड़ंत इंसानों से होने की जानकारी भी सामने आई है। झाड़ियों वाली इस जगह पर हुए संघर्ष में इस टाइगर ने एक व्यक्ति को घालय भी कर दिया था। यह टाइगर अब तक महाराष्ट्र के सात जिलों और पड़ौसी राज्य तेलंगाना की यात्रा कर चुका है। इस टाइगर का नाम है सी वन। C1 नाम का यह टाइगर तीन शावकों में से एक है, जिनका जन्म टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य के T1 में हुआ। आपको बता दें कि यह अभयारण्य 10 बाघों का घर है।
रेडियो कॉलर से मिली जानकारी
इस टाइगर की गर्दन में फरवरी में रेडियो कॉलर लगाया गया था हालांकि जानकारों का कहना है कि इस रेडियो कॉलर की बेट्री 80 फीसदी तक खत्म हो चुकी है। ऐसे में बैटरी खत्म होने के बाद उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा। इस बाघ ने जून के महीने में अभयारण्य छोड़ दिया था। अभयारण्य छोड़ने के बाद से वह महाराष्ट्र के सात ज़िलों और पड़ोसी राज्य तेलंगाना की यात्रा कर चुका है। हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि इस टाइगर को "किसी तरह की अप्रिय दुर्घटना से बचाने के लिए उसे किसी नजदीकी अभयारण्य में भेजने की ज़रूरत है। क्योंकि रेडियो कॉलर में लगी बैट्री खत्म होने पर उससे संपर्क नहीं रखा जा सकेगा।

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