167 करोड़ के घाटे में तिलम संघ, राजफैड में किया जाएगा विलय


151 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया
कर्मचारियों को किया जाएगा राजफैड में समायोजित

By: Rakhi Hajela

Updated: 08 Oct 2020, 07:42 PM IST

पिछले काफी समय से घाटे में चल रहे तिलम संघ का अब राजफैड में विलय किया जाएगा। इस विलय पर राज्य सरकार ने मुहर लगा दी है। तिलम संघ तकरीबन 167 करोड़ रुपए के घाटे में चल रहा है और लगभग 151 करोड़ रुपए की देनदारियां भी उस पर हैं। तिलम संघ के घाटे को देखते हुए सहकारिता के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। यह निर्णय गुरुवार को शासन सचिवालय में तिलम संघ के राजफैड में विलय को लेकर हुई बैठक में किया गया। बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना ने की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 से पहले तिलम संघ राजफैड का ही अंग था लेकिन विश्व बैंक की शर्तो के आधार पर 1991 में राजफैड से अलग होकर तिलम संघ की स्थापना की गई थी तथा वर्ष 2008 से तिलम संघ के तीनों उत्पादन संयत्र कोटा, श्रीगंगानगर एवं फतेहनगर बंद हैं। इन संयत्रों की मशीनरी भी पुरानी हो चुकी है। आपको बता दें कि आज हुई बैठक में प्रमुख शासन सचिव सहकारिता कुंजीलाल मीणा, रजिस्ट्रार मुक्तानन्द अग्रवाल, प्रबंध निदेशक राजफैड सुषमा अरोड़ा, संयुक्त शासन सचिव (सहकारिता) नारायण सिंह, अतिरिक्त रजिस्ट्रार (मार्केटिंग) एम.पी. यादव सहित राजफैड एवं तिलम संघ के अधिकारी उपस्थित थे।
byte -उदयलाल आंजना, सहकारिता मंत्री।

कर्मचारियों का होगा समायोजन
आपको बता दें कि इस विलय के बाद तिलम संघ के कर्मचारियों का भी राजफैड में ही विलय किया जाएगा। तिलम संघ में वर्तमान में 113 कार्मिक कार्यरत है। जिसमें से 40 कार्मिक अगले साल रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में शेष बचे 84 कार्मिकों का राजफैड में समायोजन किया जाएगा। तिलम संघ के राजफैड में विलय से राजफैड को भी फायदा होगा तथा राजफैड में अधिकारियों और कर्मचारियों के रिक्त पदों की भी पूर्ति हो जाएगी। उन्होंने बताया कि तिलम संघ के पास बाजार दर से लगभग 500 करोड़ की संपत्तियां हैं, जो राजफैड में तिलम संघ के विलय होने पर राजफैड के पास आ जाएगी।
1990 में हुई थी स्थापना
आपको बता दें कि तिलम संघ की स्थापना 1990 में हुई थी। इसका कार्य सोयाबीन, यसरसों, मंूगफली आदि का संग्रहण और प्रोसेसिंग कर विपणन करना है। तिलम संघ के अधीन आठ तेल मिल कोटा, बीकानेर, फतेहनगर, श्रीगंगानगर, जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुर सिटी, झुंझुनू में स्थापित की गई थीं। संघ की जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुरसिटी, झुंझुनू और बीकानेर इकाइयां लगातार घाटे में चलने के कारण बंद कर दी गई। झुंझुनू और जालौर परियोजना को बेच दिया गया।

इनका कहना है,
तलम संघ को राजफैड में विलय करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तिलम संघ वर्तमान में लगभग 167 करोड़ रुपए के घाटे में है तथा लगभग 151 करोड़ रुपए की देनदारिया है़। तिलम संघ के विलय होने पर 89 कार्मिक राजफैड में समायोजित होंगे। राजफैड में कर्मचारियों की कमी भी इससे दूर हो जाएगी।
उदयलाल आंजना, सहकारिता मंत्री।

Rakhi Hajela Desk
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