राजनीति के दंगल में अकेले ही पतंग उड़ा रहे हैं तिवाड़ी

राजनीति के माहिर खिलाड़ियों में शुमार पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी सक्रांति पर सुबह से शाम तक घर की छत पर पतंगों के पेंच लड़ाते रहे। वे राजनीति के दंगल में भी पतंग की तरह ही पेंच लड़ाते रहे हैं। वे पहले शह देते हैं, फिर अपने पेटे(चपेट) में लेकर प्रतिद्वंदियों की डोर काट देते हैं।

जयपुर
राजनीति के माहिर खिलाड़ियों में शुमार पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी सक्रांति पर सुबह से शाम तक घर की छत पर पतंगों के पेंच लड़ाते रहे। वे राजनीति के दंगल में भी पतंग की तरह ही पेंच लड़ाते रहे हैं। वे पहले शह देते हैं, फिर अपने पेटे(चपेट) में लेकर प्रतिद्वंदियों की डोर काट देते हैं। जिस तरह से पतंगबाजी के दंगल में चरखी पकड़ने वाले होते हैं, ठीक उसी तरह से पहले पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता उनकी चरखी पकड़ते थे, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुद की पार्टी बना ली, अब राजनीति के इस दंगल में वे अकेले ही पतंग उड़ा रहे हैं।

पतंगबाजी पर चर्चा के दौरान तिवाड़ी ने कहा कि पहले की पतंगबाजी और अब की पतंगबाजी में का काफी चेंज आ गया है। पहले वे खुद मांझा तैयार करते थे, क्योंकि उस वक्त मांझा बहुत महंगा होता था। खर्चे के इतने पैसे भी घरवाले नहीं देते थे। इसलिए सादा डोर,समुद्र का झाग, कांच आदि को पीस कर मांझा तैयार करते थे। वे चार बार मांझा सूंता करते थे। तिवाड़ी के अनुसार पहले दीपावली के बाद से ही पतंगबाजी शुरू हो जाती थी, लेकिन अब इसका शौक कम हुआ है, वहीं डीजे और हो हल्ला बढ़ गया है।

घनश्याम तिवाड़ी के अनुसार मौजूदा राजनीति के हालात को देखते हुए वे इस समय कोई खींचतान नहीं कर रहे हैं, इस वक्त चुपचाप बैठ अपने प्रतिद्वंदियों की चालों को भांप रहे हैं। या यूं कहें कि वे अभी ढील दे रहे हैं। जैसे ही हवा उनके मािफक होगी सामने वाले को पेटे में लेकर उनकी पतंग की डोर काटने का दांव चलेंगे।

Prakash Kumawat
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