तंत्र साधना के लिए बढ़ी कछुए की मांग

तंत्र साधना के लिए बढ़ी कछुए की मांग
तंत्र साधना के लिए बढ़ी कछुए की मांग

Rakhi Hajela | Updated: 09 Oct 2019, 03:40:13 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

तस्करों के निशाने पर कछुए
तंत्र साधना के लिए बढ़ी कछुए की मांग
वास्तु शास्त्र भी बढ़ा रहा कछुए की तस्करी
तांत्रिक करते हैं नोटों की बारिश करवाने का दावा

दीपावली (Diwali) नजदीक आते ही तंत्र साधना ( Tantra Cultivation ) के लिए कछुओं ( Tortoise ) की मांग बढ़ गई है। वैसे कछुओं की तस्करी ( Tortoise Smuggling )का कारोबार मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए भी होता है, लेकिन तंत्र.मंत्र विद्या के जरिए नोटों की बारिश कराने वाले तांत्रिकों के दावों के कारण कछुओं की मांग तेजी से बढ़ गई है। इनमें 20 और 18 नाखून वाले कछुओं की मांग कुछ ज्यादा है। दीपावली पर तंत्र मंत्र साधना के कारण बढ़ती मांग को देखते हुए तस्कर सक्रिय हो गए हैं। एक रिपोर्ट:

संरक्षितों जीवों की जान पर खतरा साबित हो रही भ्रांतियां
आपने कई घरों, दुकानों में छोटे से पानी के पात्र में चांदी या मार्बल का बना कछुआ रखा देखा होगा। इन्हें वास्तुशास्त्रियों की सलाह पर वास्तु दोष दूर करने और सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। इसकी जगह अब भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोग घरों की खूबसूरती बढ़ाने और वास्तु दोष दूर करने के लिए कांच के बर्तन में असली कछुओं को पालने लगे हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि घर में कछुआ रखने से धन यानि लक्ष्मी आती है। इस तरह की भ्रांतियां इन संरक्षितों जीवों की जान पर खतरा साबित हो रही हैं। वन्य जीव संरक्षण के लिए काम कर रही वल्र्ड संस्था के निदेशक मनीष सक्सेना कहते हैं विदेशों में इन कछुओं की कीमत काफी ज्यादा होती है। भारत के कुछ राज्यों और कई देशों में इन कछुओं का इस्तेमाल यौनवर्धक के तौर पर भी होता है। इस वजह से इनकी मांग और बढ़ जाती है। पूर्वोत्तर भारत समेत कुछ राज्यों में कछुए का मांस खाने का भी चलन है, जो कि प्रतिबंधित है।

देश में हैं कछुओं की 55 जातियां
आपको बता दें कि हमारे देश में कछुओं की करीब 55 जातियां हैं, जिसमें से साल, चिकना, चितना, छतनहिया, रामानंदी, बाजठोंठी, सेवार और स्पोडिड पोंडटर्टल आदि जैसे दुर्लभ जाति के कछुए भी पाए जाते हैं।
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नरम परत देखकर तय होती हैं कीमत -
तंत्र विद्या करने वालों का दावा है कि नरम परत वाले कछुओं के अधिक फूलने के कारण काफी देर तक नोटों की बारिश होती है
कछुओं की कीमत नरम व कड़ी परत देखकर तय होती है
20 नख वाले नरम कछुओं से एकाएक धनवान बनने की मंशा रखने वाले बड़ी रकम देने को तैयार हो जाते हैं
यदि किसी शिकारी के हाथ 18 नख वाला कछुआ लग जाता है तो वह भी बड़ी कमाई करता है
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तमाम मान्यताएं और भ्रांतियां-
कछुओं के इस पूरे खेल को लेकर कई मान्यताएं है तो भ्रांतियां भी हैं
मसलन कछुए के पेट में जितने का नोट रखा जाएगा, उसी राशि के नोटों की बरसात होगी
लिहाजा लोग हजार का नोट लेकर तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं
हमेशा तंत्र.मंत्र का यह अनुष्ठान सुनसान स्थानों पर होता है
मान्यता है कि तंत्र मंत्र से मिले पैसे को तीन माह में ही खर्च करना होता है नहीं तो नोट अपने आप उड़ जाते हैं
नोटों के लालच में लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं
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कछुआ संरक्षण के लिए चम्बल नेशनल सेंचुरी
1979 में सरकार ने कछुओं सहित दूसरे जलचरों को को बचाने के लिए चम्बल से लगे 425 किमी में फैले तटीय क्षेत्र को राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी घोषित कर दिया था। इसके बाद भी 1980 से अब तक 85 हजार कछुए बरामद किए जा चुके हैं। 100 तस्कर पकड़े गए हैं। 14 तस्कर तो पिछले ढाई साल में ही पकड़े जा चुके हैं।

चम्बल हैं लाल सफेद धारी कछुओं का गढ़
चम्बल से लगा क्षेत्र तस्करों के निशाने पर रहता है। कारण है इस क्षेत्र में चम्बल, यमुना, सिंधु,क्वारी और पहुज जैसी नदियों के अलावा दूसरी छोटी नदियों और तलाब में बड़ी तदाद में कछुए हैं। ऐसे ही कछुओं के बीच में लाल.सफेद धारी वाला कछुआ भी पाया जाता है जिसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत है। देश में जादू.टोने के चलते इसकी मांग रहती है।
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इन देशों में है डिमांड-
इलैण्ड, चीन, हांगकांग आदि देशों में कछुओं की बहुत डिमांड है
यहां स्वाद के लिए कछुआ पसंद किया जाता है
साथ ही यौनवर्धक दवाओं के लिए भी कछुए का इस्तेमाल बड़ी तदाद में किया जाता है
इन देशों में कछुए के मांस के साथ सूप भी पसंद किया जाता है

हड्डियों के पाउडर के लिए भी हो रही तस्करी
कछुओं की हड्डी की भी तस्करी की जाती है
हड्डियों को पीस कर उनका पाउडर बनाया जाता है
पाउडर के रूप में बांग्लादेश को तस्करी की जा रही है
इसका सीरप बनाकर यौनवर्धक दवा के रूप में थाइलैण्ड और हांगकांग को बेचा जाता है

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