देखभाल जुड़वां बच्चों की

जुड़वां बच्चों की परवरिश में मां की जिम्मेदारी अहम होती है। उसके लिए आसान नहीं होता दोनों बच्चों का अच्छी तरह ध्यान रखना। बच्चों को सुलाने, फीड कराने, नहलाने-धुलाने सहित हर एक काम मां के लिए दोगुना हो जाता है। जुड़वां बच्चे होने पर इन बातों का ध्यान रखें।

रूटीन बनाएं
जुड़वां बच्चों के खाने-पीने, सोने आदि का पूरा ध्यान रखना होता है। मां के लिए यह थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन इन कामों को आसान बनाने के लिए बेहतर यह है कि आप एक रूटीन तय कर लें। दो नवजात शिशुओं का एक ही समय में ध्यान रखने के लिए सबसे बेहतर तरीका है कि आप उनके लिए एक रूटीन बना लें। सुबह उठने से लेकर सोने तक की दिनचर्या निर्धारित होने पर आप न केवल दोनों बच्चों पर सही ध्यान दे पाएंगे बल्कि अपना भी ध्यान रख पाएंगे। काम अव्यवस्थित होने पर आप पर काम का दबाव रहेगा और यह तनाव का कारण हो सकता है।

फीड कराएं तो
जुड़वां बच्चे होने पर कई मांएं यह सोचकर चिंतित रहती है कि उनके लिए मदर फीड पूरा हो भी पाएगा कि नहीं। ध्यान रखना चाहिए कि जब बच्चे जुड़वां होते हैं तो मां का दूध भी उसी मात्रा में आता है। बच्चों की एक्टिविटी से यह जानने की कोशिश करें कि किसे पहले भूख लगती है। उसी क्रम में बच्चों को बारी-बारी स्तनपान करवाएं। कभी-कभी मां किसी एक पॉजीशन में आराम महसूस करती है, तो उसी तरफ से बच्चों को स्तनपान करवाती रहती हैं। मां की सेहत के लिए जरूरी है कि दोनों ही स्तनों से बराबर फीड करवाया जाए।

सावधानी से नहलाएं
छोटे बच्चों को नहलाना जिम्मेदारी पूर्ण काम होता है। बच्चों को अकेले न नहलाएं। बच्चों की स्वच्छता के लिए यह जरूरी है कि उन्हें नहलाया जाए। बच्चों को नहलाने में किसी की मदद लें। चाहे वह घरेलू सहायिका हो या परिवार का कोई सदस्य। बच्चों को नहलाते वक्त हैंड शॉवर का इस्तेमाल करें। बच्चों को नहलाते वक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। बहुत संभलकर बच्चों को नहलाएं। बेहतर होगा कि जिस जगह पर आप बच्चों को नहला रहे हैं वहां नर्म टॉवल बिछा लें।

तुलना न करें
पेरेंट्स को जुड़वां बच्चों की परवरिश में कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है। उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि वे दोनों बच्चों की आपस में तुलना न करें। बच्चे हर दिन बड़े होते हैं और हर दिन कोई नई एक्टिविटी सीखते हैं। जुड़वां बच्चों में कई बार सीखने का क्रम कम-ज्यादा होता है। अगर एक बच्चा जल्दी बैठना या चलना सीख जाए, तो यह जरूरी नहीं कि दूसरा बच्चा भी उतना ही जल्दी बैैठना या चलना सीख जाए।

दोनों को समय
जुड़वां बच्चों की जिम्मेदारी आम बात नहीं होती। आपको उनका विशेष खयाल रखना पड़ता है। जुड़वां बच्चों को बारी-बारी से गोद लेना चाहिए। एक साथ दोनों बच्चों की जरूरतों को समझा पाना मां के लिए बहुत मुश्किल होता है, इसीलिए बेहतर यह है कि जुड़वां बच्चों को बारी-बारी समय दें और उन्हें गोद में लें। दोनों बच्चों को पर्याप्त समय देने पर दोनों बच्चों का अच्छी तरह ध्यान रखा जा सकता है और दोनों बच्चों का मां के साथ रिश्ता गहरा होता है।

Chand Sheikh Desk
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