जायदाद का मामला या पति-पत्नी में मतभेद, आखिर क्या रही वजह जो दो नेत्रहीन भाइयों का ऐसा हुआ अंत

संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत, लोग बोले, शरीर पर चोट के निशान, हथेली हो रखी थी काली, पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगा मौत के कारण, मकान में रहने वाले भाई से चल रहा था विवाद

By: pushpendra shekhawat

Published: 28 May 2020, 07:06 PM IST

मुकेश शर्मा / जयपुर. महेश नगर थाना अंतर्गत रामनगर विस्तार में गुरुवार को दो नेत्रहीन भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एक भाई की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, वहीं दूसरे भाई ने पुलिस के सामने ही दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

थानाधिकारी बालाराम ने बताया कि राम नगर विस्तार निवासी गोपाललाल यादव (65) और उनके छोटे भाई जगदीश यादव (50) की मौत हुई है। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। इसी मकान में मृतकों का तीसरा भाई सीताराम, उसकी पत्नी और बेटी रहती हैं। मृतक गोपाल के बेटे ने मर्ग दर्ज करवाई है। अनुसंधान के बाद कारणों का पता चलगा। हालांकि स्थानीय निवासी कैलाश, प्रकाश सहित अन्य लोगों का आरोप था कि मृतक गोपाल के शरीर पर चोट के निशान थे और उसके हाथों की हथेलियां काली हो गई थी।

विवाद के चलते नहीं करते थे भाई से बातचीत

सीताराम ने बताया कि वे चार भाई थे। इनमें सबसे छोटे नेत्रहीन भाई रामरतन की छह माह पहले बीमारी से मौत हो चुकी। दोनों भाइयों से मकान विवाद होने के कारण बातचीत भी नहीं करते थे। कुछ अनहोने होने पर उन्हीं के उपर आरोप लगने की आशंका के चलते खाना-पीना भी नहीं देते थे। मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने दोनों भाइयों के लिए टिफिन लगा रखा था। लेकिन लॉक डाउन में स्थानीय लोग भोजन की व्यवस्था करते थे। पड़ोसी ही दोनों भाइयों को चाय पिलाते थे। सीताराम के परिजनों ने बताया कि बुधवार को कुछ लोग मकान खरीदने के लिए देखने आए भी थे।

परिजन बोले नहीं खाए तरबूज, पुलिस बोली खाए

सीताराम व स्थानीय लोगों ने बताया कि गोपाल की पत्नी व बेटा संजय कई वर्षों से अजमेर रोड पर अलग ही रहते हैं। लेकिन बुधवार को ही बेटा संजय यहां आया था और अपने साथ तरबूज लेकर आया था। सीताराम ने बताया कि संजय गोपाल व जगदीश की बजाय तरबूज उसे देकर गया था। जबकि पुलिस का कहना है कि दो दिन से दोनों भाइयों ने खाना नहीं खाया था और लिया भी नहीं था। तरबूज अधिक खा लिए थे।

सुबह चाय देने आए, तब पता चला

स्थानीय लोगों ने बताया कि रोज सुबह पड़ोसी ही नेत्रहीन भाइयों को चाय पिलाते थे। भाई सीताराम से विवाद के चलते भोजन और चाय बाहर गेट के पास ही पकड़ाते थे। दोनों भाई खुद के कमरे की अंदर से कुंदी बंद रखते थे। गुुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे चाय देने पहुंचने पर दोनों भाइयों को आवाज लगाई। लेकिन बाहर नहीं आए। तब कमरे का गेट धकेला तो अंदर से कुंदी बंद नहीं थी। गेट खुल गया और गोपाल फर्श पर अचेत थे। सामान बिखरा था और जगदीश गोपाल के पैरों के पास बैठा था। पुलिस ने जगदीश को कमरे से बाहर निकाला। करीब दो घंटे बाद ही जगदीश ने पुलिस के सामने दम तोड़ दिया। जगदीश की दिमागी हालत भी सही नहीं थी।

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