जयपुर में सिगड़ी के धुएं ने उजाड़ा परिवार, पति-पत्नी की हुई मौत, मासूम हुआ बेसहारा

शास्त्री नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुआ हादसा, जयपुर में एक महीने में सिगड़ी से गई छह जानें, एक घंटे में ही घुटा दम, बगल वाले कमरे में पत्नी का भाई और तीन साथी भी थे उपस्थित, तीन रोशनदान, दो गेट, सभी बंद होने से जहरीली गैंस भर गई कमरे में

मुकेश शर्मा / जयपुर। जयपुर में सर्दी से बचने के लिए कमरे में सिगड़ी जलाने से उठे धुएं ने एक हंसते खेलते परिवार को उजाड़ दिया। सिगड़ी के धुएं से कमरे के अंदर ही पति—पत्नी की मौत हो गई। उनका दस साल का बच्चा बेसहारा हो गया। गौरतलब है कि पिछले एक महीने से भी कम में सिगड़ी के धुएं से जयपुर में हुए तीन हादसों में छह लोगों की जान जा चुकी हैं।


ताजा मामला शास्त्री नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का है। जहां रविवार रात चूड़ी कारखाना मालिक और उसकी पत्नी की सिगड़ी (अंगीठी) के धुआं से दम घुटने पर मौत हो गई। एक घंटा ही कमरे का गेट बंद था। इसी दौरान यह हादसा हो गया। भट्टा बस्ती थाना पुलिस ने सोमवार को कांवटिया अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया और मामले की जांच कर रही है। मृतक दम्पत्ति के एक बेटा है, जो भी झोटवाड़ा के एक मदरसे में रहकर ही पढ़ाई करता है।

पुलिस ने बताया कि हादसे का शिकार हाल हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और मूलत: मूलत: दरभंगा बिहार निवासी सलाउद्दीन और उसकी पत्नी निखत हुए। दम्पत्ति पांच साल से जयपुर में रहकर चूड़ी बनाने का काम करते थे। हादसे होने वाले मकान की दूसरी मंजिल पर दो साल पहले ही रहने आए थे और यहां पर ही चूड़ी बनाने का कारखाना खोल रखा है। रात को नमाज पढ़कर आने के बाद सलाउद्दीन और निखत भोजन करने के बाद सोने कमरे में चले गए। सर्दी होने पर कमरे में सिगड़ी जला ली।

कमरे में तीन रोशनदान है, लेकिन उनकी जाली गंदगी से जाम थी। जबकि एक गेट बंद रहता है और दूसरा गेट खुला था, उसे रात 9 बजे निखत ने अपने भाई सियाज को आवाज लगाकर दरवाजा बंद करवा दिया। दूसरे कमरे में तीनों मजदूर वाट्सऐप देख रहे थे और सियाज बिहार में अपने परिजनों से मोबाइल पर बात करने लगा। सियाज ने बताया कि करीब एक घंटे बाद रात 10 बजे कमरे में जाने के लिए गेट खोला तो बहन और जीजा, दोनों बैड पर उलटे अचेत अवस्था में पड़े थे। उनकी मौत हो चुकी थी। प्राथमिक जांच में पुलिस ने बताया कि दोनों की मौत कमरे में कार्बनडाइ ऑक्साइड बनने से उनका दम घुट गया।

pushpendra shekhawat Desk
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