बीस लाख पारिवारिक सूक्ष्म उद्योग होंगे ग्लोबल, सरकार थामेगी उनका हाथ

जयपुर. देश में 25 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं। इनमें 80 प्रतिशत पारिवारिक उद्यम हैं और परिवार के सदस्य मिलकर चटनी, अचार, पापड़, बड़ी जैसी चीजें बनाकर बेचते हैं। केन्द्र सरकार अब इन इकाइयों को वित्त उपलब्ध कराकर उन्हें 'लोकल ब्रांड के साथ ग्लोबल' बनाने में मदद करेगी।

By: Subhash Raj

Published: 29 Jun 2020, 09:08 PM IST

हर इकाई को उनकी परियोजना लागत के 35 प्रतिशत तक की मदद उपलब्ध कराई जायेगी। अधिकतम 10 लाख रुपये की मदद दी जायेगी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी। पर्वतीय तथा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी। स्वयं सहायता समूहों को अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति सदस्य के हिसाब से मदद उपलब्ध कराई जायेगी। उन्हें उत्पादों के मूल्यवर्धन, पैकेजिंग बेहतर बनाने, लाइसेंस हासिल करने, मशीन लगाने, बैंक ऋण लेने और उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद की जायेगी। केंद्र सरकार 'एक जिला, एक उत्पाद' की नीति पर योजना को आगे बढ़ाना चाहेगी, हालाँकि राज्य चाहें तो एक ही उत्पाद पर एक से अधिक जिलों में भी फोकस कर सकते हैं। जिले के महत्त्वपूर्ण उत्पाद की पहचान कर लेने के बाद उस जिले में उस उत्पाद का क्लस्टर तैयार किया जायेगा। इस योजना से सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता तैयार होगा और नौ लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। यह योजना किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। योजना के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और आकांक्षी जिलों पर फोकस किया जायेगा। इससे किसानों और लघु उद्यमों को सीधा फायदा होगा।
इसके अलावा ऑपरेशन ग्रीन्स के तहत पहले सिर्फ आलू प्याज टमाटर के भंडारण एवं रखरखाव के लिए सरकार वित्तीय मदद देती थी। अब योजना का विस्तार करते हुए सभी प्रकार के जल्द खराब होने वाले फलों एवं सब्जियों को भी इसमें शामिल किया गया है। अभी यह योजना छह महीने के लिए पायलट आधार पर होगी। इन उत्पादों के भंडारण एवं परिवहन में केंद्र सरकार किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी देगी। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने के लिए एक ऑनलाइन कौशल विकास योजना की शुरुआती की गई। इसके तहत इच्छुक युवाओं को तीन महीने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जायेगा। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें प्रमाणपत्र भी दिया जायेगा। कुल 41 तरह के पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। इनमें अचार, घी, मक्खन आदि बनाने और ऐसे ही अन्य प्रशिक्षण दिये जायेंगे। डेयरी उद्योग या दूसरे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में काम करने के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति के युवाओं को प्रशिक्षत किया जायेगा।

Subhash Raj
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