जेएलएन मार्ग पर एसएमएस अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के बीच सडक़ के 3 मंजिल नीचे बनेगा अंडरपास

dinesh saini

Publish: Oct, 12 2017 06:23:09 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
जेएलएन मार्ग पर एसएमएस अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के बीच सडक़ के 3 मंजिल नीचे बनेगा अंडरपास

टोंक रोड पर बन रहे अण्डरपास के शिलान्यास समारोह के दौरान इस संबंध में लम्बी चर्चा भी हुई थी...

जयपुर। जेएलएन मार्ग पर प्रस्तावित अण्डरपास सडक़ से तीन मंजिल नीचे बनेगा। यानी सडक़ से करीब 10 मीटर नीचे। सवाई मानसिंह चिकित्सालय (बांगड़ हिस्से की तरफ) से मेडिकल कॉलेज को जोडऩे वाले इस ब्रिज की प्राथमिक फिजिबलिटी रिपोर्ट में यह सामने आया है। बीच में बीसलपुर पेयजल लाइन आ रही है, जिसके कारण अंडरपास निर्माण की शुरुआत उससे नीचे ही हो सकेगी।

 

जयपुर विकास प्राधिकरण के लिए यह स्थिति परेशान करने वाली है क्योंकि इतनी गहराई में अण्डरपास निर्माण मुश्किल होगा और इसकी पूर्ण उपयोगिता पर भी संशय बना रहेगा। हालांकि जेडीए अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यहां राहगीरों के लिए वैकल्पिक मार्ग जरूरी है, इसलिए जरूरत के आधार पर फैसला होगा।

 

इसलिए है मुश्किल...
जेएलएन मार्ग पर मेडिकल कॉलेज वाले हिस्से की तरफ से बीसलपुर पाइपलाइन गुजर रही है। सडक़ से 1.5 मीटर नीचे से पाइपलाइन शुरू हो रही है, जिसका निचला हिस्सा करीब 4.5 मीटर गहराई तक है। ऐसे में अण्डरपास का निर्माण इस गहराई से करीब 2 मीटर नीचे से करना होगा। यहां 180 डाया की पाइपलाइन है। परियोजना शाखा के अधिकारियों ने पिछले दिनों जलदाय विभाग के अधिकारियों के साथ मंथन भी किया।

 

जेडीए के लिए चुनौती...
अस्पताल प्रशासन के जरूरत जताने के बाद अंडरपास निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने जेडीसी वैभव गालरिया को निर्देश दिए थे। टोंक रोड पर बन रहे अण्डरपास के शिलान्यास समारोह के दौरान इस संबंध में लम्बी चर्चा भी हुई थी। इसके बाद ही जेडीए ने फिजिबलिटी रिपोर्ट बनवाने का काम शुरू किया।

 

अभी टोंक रोड पर
टोंक रोड पर एसएमएस अस्पताल व ट्रोमा सेंटर के बीच अण्डरपास का निर्माण चल रहा है। यहां अण्डरपास की सडक़ से गहराई 4.8 मीटर है। इसमें भी 3.5 मीटर में तो अण्डरपास होगा, जबकि इसके ऊपर-नीचे स्लेब लगाए जाएंगे। इसकी निर्माण लागत 14.92 करोड़ रुपए होगी। लम्बाई 34 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर है। इसी में 22 दुकानें भी बनाई जा रही हैं।

 

जनता हिचकी तो एफओबी का सहारा
अण्डरपास जितना गहराई में होगा, लोगों को उतना ही नीचे उतरना और ज्यादा चलना पड़ेगा। विषय विशेषज्ञों के मुताबिक राहगीर आसान राह पसंद करता है। सीधे रूट पर ही लोगों की ज्यादा आवाजाही रहती है। यहां अण्डरपास ज्यादा गहराई में होगा तो लोग उसका उपयोग करने से हिचकेंगे। इस स्थिति से बचने के लिए एस्केलेटर लगाया जा सकता है। एयरपोर्ट की तरह धरातल पर भी यही तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसा नहीं होने पर फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण संभव है। हालांकि इससे जेएलएन मार्ग की एकरूपता और अल्बर्ट हॉल, नाहरगढ़, गढग़णेश की तरफ देखने के आकर्षण में रुकावट हो सकती है।

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