राजस्थान का अनोखा स्वयंवर- यहां पति से पहले लड़की पिता को पहनाती है वरमाला

Punit Kumar

Publish: Nov, 15 2017 05:51:22 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
राजस्थान का अनोखा स्वयंवर- यहां पति से पहले लड़की पिता को पहनाती है वरमाला

मेले में स्वयंवर की ऐसी अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें लड़कियों को मनचाहा वर चुनने की पूरी आजादी रहती है।

राजस्थान अपने रहन-सहन और खानपान को लेकर जितना अधिक लोकप्रिय है, उतना ही यहां की आदिवासी समाज की रीति-रिवाज भी है। प्रदेश के माउंटआबू इलाके के गांव में रहने वाले आदिवासी समाज में लड़कियों की शादी-विवाह को लेकर ऐसी अजीबोगरीब परंपरा है, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। भले ही हम इन्हें पिछड़ों की कतार रखते हैं लेकिन इनकी ये खास और पुरानी परंपरा पढ़े-लिखे और शिक्षित समाज की कल्पना से कहीं आगे है।

 

लड़कियों को वर चुनने की मिलती है आजादी-

 

दरअसल, हमारे समाज में आज भी लड़कियों को जहां अपना वर चुनने की आजादी नहीं है, तो वहीं प्रेम-विवाह और भागकर शादी करना एक बड़े अपराध के रुप में देखा जाता है। जबकि माउंटआबू स्थित नक्की झील पर पीपल पूनम हर साल आदिवासी समाज द्वारा मेला का आयोजन होता है, तो यहां मेले में स्वयंवर की ऐसी अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें लड़कियों को मनचाहा वर चुनने की पूरी आजादी रहती है। लेकिन इसका अंदाज भी उतना ही खास होता है।

Unique Marriage Traditions in Rajasthan

समाज के लोगों की भी रहती है सहमति-

 

इस पुरानी और अनूठी परंपरा की बात करें तो मेले में स्वयंवर के दौरान आदिवासी समाज की लड़कियां खुद अपने पसंद का दूल्हा चुनती है। इस दौरान समाज के लोग भी वहीं मौजूद रहते हैं और उनकी भी रजामंदी रहती है। सबसे हैरान करने बात कि वर चुनने से पहले हर युवती पहले अपने पिता से इसके लिए इजाजत लेती है। और पिता को माला पहनाती है। इसके बाद लड़की अपने पसंद के युवक को माला पहनाकर उसे अपना जीवनसाथी के रुप में चुनती है।

 

लड़की भाग भी सकती है पसंद के लड़के के साथ-

 

इस विवाह के लिए पहले तो पिता अपने पंसद के कुछ लड़कों चुनता है, और उन्हें एक जगह खड़ा करता है। जिसके बाद लड़की को पिता के आदेश के बाद उसमें से किसी को पसंद करना होता है। लेकिन इसके बावजूद भी लड़की को कोई वर पसंद नहीं आया तो वह अपने पंसद के लड़के को जीवनसाथी बना कर उसके साथ वहां से भाग सकती है। जिसे हमारे समाज में आज भी अनुमति नहीं मिली है। हालांकि यहां भी लड़की द्वारा ऐसा करने पर गांव में समाज की पंचायत बैठती है, और फिर युवक के परिजनों से हर्जाना वसूला जाता है। जिसके बाद ही दोनों को शादी करने की इजाजत मिलती है।

 

इसके पीछे है खास कहानी-

 

गौरतलब है कि आदिवासियों की इस खास परंपरा के पीछे सदियों पहले की एक प्रेमकथा जुड़ी हुई है। जिसका अनुसरण आज भी आदिवासी समाज के लोग करते हैं, और मेले में स्वयंवर के जरिए लड़कियों को उनके पसंद का वर चुनने की आजादी देते हैं। जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है।

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