राजस्थान की इस रियासत की बनी सेना, आज देश के लिए कर रही अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन

राजस्थान की इस रियासत की बनी सेना, आज देश के लिए कर रही अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन

dinesh saini | Publish: Mar, 14 2018 05:10:35 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

सैनिकों को इंग्लैण्ड के कोल्ड स्ट्रीम गार्ड्स से प्रशिक्षण दिलाने के साथ कैप की जगह साफा व स्टार के बजाय स्वास्तिक चिन्ह रखा गया

जयपुर। ढूंढाड़ रियासत की सवाई मान गार्ड्स से बनी भारतीय सेना की 17वीं राजपूताना राइफल्स रेजीमेंट आज भी युद्धों में अद्वितीय शौर्य व वीरता का प्रदर्शन कर रही है। इस रेजीमेंट का गठन सवाई मानसिंह द्वितीय ने 1932 में किया था। शुरुआत में छह फीट के करीब सात सौ राजपूत जवानों को इसमें भर्ती किया गया। इंग्लैण्ड की बुलविच सैन्य एकेडमी से एक साल का प्रशिक्षण लेने के बाद महाराजा ने पौराणिक नागा पलटन के करीब दो हजार सैनिकों को हटाने के साथ ही आधुनिक युद्ध पद्धति की नई बटालियन खड़ी की थी।

 

खातीपुरा रोड की सैनिक छावनियों के बजाय उन्होंने इस रेजीमेंट के मुख्यालय की इमारत रामबाग के सी-स्कीम स्थित परवण की तलाई पर बनवाई। इमारत का नाम आमेर महाराजा भगवन्तदास के नाम पर भगवन्तदास बैरक्स रखा गया। आजादी के बाद मान गाड्र्स के इस मुख्यालय भवन में राजस्थान का शासन सचिवालय खोला गया। इस इमारत को उस जमाने के ठेकेदार अनन्तराम ने ब्रिटिशआर्मी मुख्यालय के वास्तु शिल्प के आधार पर बनाया था।

 

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साफा और स्वास्तिक चिन्ह को दी प्रमुखता
सैनिकों को इंग्लैण्ड के कोल्ड स्ट्रीम गाड्र्स से प्रशिक्षण दिलाने के साथ कैप की जगह साफा व स्टार के बजाय स्वास्तिक चिन्ह रखा गया। सचिवालय के सामने बना अशोक क्लब सवाई मान गार्ड्स अफसरों की मैस बनी।


शिलादेवी का होता था जय घोष
इस रेजीमेंट में शिलादेवी के नाम का उच्चारण होता और हुर्रा की बजाय माता शिलादेवी का जय घोष किया जाता था। मान गाड्र्स ने मिस्त्र और इटली के अलावा दिसम्बर 1945 में हांगकांग में अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन कर एशिया कमान के सेनापति लार्ड लुई माउंटबेटन से 650 साल पुरानी जापानी तलवार प्राप्त की थी।

 

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लेडीगली पहाडिय़ों का रण जीता
मान गार्ड्स ने 27 जनवरी 1948 में पाकिस्तान से कश्मीर में भेजे कबालियों को खदेड़ा और मीरकंथी और लेडीगली पहाडिय़ों का रण जीता। 17वीं राजपूताना राइफल्स लेडीगली विजय का उत्सव आज तक मना रही है। सेवानिवृत्त कर्नल करणी सिंह निराधनु के मुताबिक आजादी के बाद मान गाड्र्स का सेना की 17वीं राजपूताना राइफल्स में विलय हुआ। दशहरा आदि पर महाराजा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता था।


जयपुर फाउंडेशन के सियाशरण लश्करी के मुताबिक जब जगन्नाथ पहाडिय़ा मुख्यमंत्री बने तब सचिवालय के पोर्च में लगे मान गार्ड्स का मोनोग्राम हटा दिया गया। राजपूताना राइफल्स में विलय होने के बाद से मान गाड्र्स का झंडा निशान आज भी आमेर की शिला देवी के सामने ही झुकाया जाता हैं।


पिछले दिनों अरुणाचल में चीन सीमा के डोकमाल में तैनात 17वीं राजपूताना रेजीमेंट ने आमेर की शिला देवी मंदिर परिसर में झंडा निशान के साथ माता को सलामी दी थी। मान गाड्र्स की परेड का प्राचीन तैल चित्र सिटी पैलेस के गलियारों में लगा है।

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