scriptUrdu missing from fifth board exam | पांचवीं बोर्ड परीक्षा से उर्दू गायब | Patrika News

पांचवीं बोर्ड परीक्षा से उर्दू गायब

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे पांचवीं क्लास के स्टूडेंट्स की परीक्षा का टाइमटेबल जारी हो गया है। परीक्षाएं 19 अप्रेल से शुरू होने जा रही हैं लेकिन इस टाइमटेबल से उर्दू गायब

जयपुर

Published: March 26, 2022 09:41:19 pm

पांचवीं बोर्ड परीक्षा से उर्दू गायब
स्कूल से गायब, मदरसों तक हुई सीमित
जयपुर।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे पांचवीं क्लास के स्टूडेंट्स की परीक्षा का टाइमटेबल जारी हो गया है। परीक्षाएं 19 अप्रेल से शुरू होने जा रही हैं लेकिन इस टाइमटेबल से उर्दू गायब है।
मदरसे तक सीमित हुइ्र्र उर्दू
अप्रेल में आयोजित होने जा रही है परीक्षा में उर्दू विषय का प्रश्नपत्र सिर्फ मदरसों के विद्यार्थियों तक सीमित रखा गया है जबकि सिंधी के साथ उर्दू सरकारी स्कूलों में भी प्राथमिक स्तर में संचालित रही है। विभाग की ओर से जारी किए टाइमटेबल के मुताबिक स्कूलों में पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की सिंधी की परीक्षा होगी, साथ ही पहली से पांचवीं तक सरकारी स्कूलों में संस्कृत की परीक्षा होगी लेकिन उर्दू की परीक्षा केवल मदरसों में होगी। वर्ष 2019 तक पांचवी बोर्ड परीक्षा में भी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी सम्मिलित रहे हैं 2020 और 2021 में कोविड 19 के चलते सभी विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रमोट किया था।
सीएम कर चुके हैं घोषणा
वही दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने बजट 2021-22 में 20 विद्यार्थी प्रथमिक स्तर पर नामांकन होने पर सरकारी विद्यालय में उर्दू शिक्षण की व्यवस्था की घोषणा की थी।
सीएम कार्यालय के दखल के बाद होती है परीक्षा
ऐसा पहली बार नहीं है कि शिक्षा विभाग ने इस तरह का टाइमटेबल जारी किया हो इससे पूर्व भी ऐसा होता आया है और हर बार अभिभावकों के विरोध और मुख्यमंत्री कार्यालय की दखलअंदाजी के बाद उर्दू की परीक्षा होती थी। वर्ष 2017, 2018 और 2019 में मुख्यमंत्री कार्यालय की दखलंदाजी के बाद परीक्षा कार्यक्रम को संशोधित किया गया था और परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं। उर्दू विषय की निशुल्क किताबों का भी यही हाल रहता है। शिक्षा विभााग के इस रवैये का विरोध कर रहे अभिभावकों का कहना है कि उर्दू कोई धार्मिक शिक्षा नहीं है जिस को सिर्फ मदरसा तक सीमित रखा जाता है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 क तथा अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा कानून अधिकार 2009 के प्रावधान व शिक्षा विभाग के स्टैंडिंग दिशानिर्देशों की पालना में उर्दू की शिक्षा दी जानी चाहिए।
इनका कहना है,
उर्दू पढऩे वाले विद्यार्थियों के साथ शिक्षा विभाग लगातार भेदभाव कर रहा है। परीक्षाओं के टाइमटेबल में जल्द ही संशोधन नहीं किया गया तो बच्चों के साथ उनके अभिभावक सड़क पर उतर का प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
अमीन कायमखानी, प्रदेशाध्यक्ष
राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ।
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