घरेलू सिलेंडर का कॉमर्शियल उपयोग, अब भी कर रहे हादसों का इंतजार

Priyanka Yadav

Publish: May, 18 2018 03:46:43 PM (IST) | Updated: May, 18 2018 03:46:44 PM (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
घरेलू सिलेंडर का कॉमर्शियल उपयोग, अब भी कर रहे हादसों का इंतजार

पत्रिका पड़ताल की तो सच आया सामने

जयपुर . सांगानेर रसोई गैस के असुरक्षित वितरण व दुरूपयोग के आगे सरकारी आदेश शून्य नजर आ रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। वहीं नागरिक आपूर्ति विभाग भी अपनी आंखे बंद किए बैठा है। बड़े पैमाने पर घरेलू गैस का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। पत्रिका ने जब इसका जायजा लिया तो शहर में जगह-जगह चाय नाश्ते की दुकानों, ठेलों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल होता हुआ मिला। कई जगहों पर इन्हें छिपाकर उपयोग लिया जा रहा है ।

 

जिम्मेदारों की नजर से दूर क्यों

जिस तरह से इनका प्रयोग किया जा रहा है उससे साफ दिखता है कि जिम्मेदारों को सिर्फ हादसे का इंतजार है। वहींं कुछ दिन पहले रसद विभाग ने अभियान चलाकर कार्रवाई की थी, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई। विभाग के अधिकारियों ने कागजी खानापूर्ती करके जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां करती है।

 

पत्रिका पड़ताल की तो सच आया सामने

केस- 1 रामपुरा रोड़ पर भीड़भाड़ वाले इलाके में चाट के ठेले पर घरेलू सिलेंडर का उपयोग होता हुआ मिला। स्टिंग के दौरान दुकानदार ने बताया कि हर दूसरे दिन सिलेंडऱ खाली हो जाता है, लेकिन ब्लेक से मंगवा लेते है। पैसे तो ज्यादा देने पड़ते है पर फोन करने के दस मिनट में मिल जाता है। रसद विभाग की कार्रवाई के बारे में पूछने पर कहा कि पांच साल से काम कर रहे है। आज तक तो कार्रवाई हुई नहीं। जब विभाग के अधिकारियों के आने का डर होता है तो गैस वाले ही सर्तक कर देेते है।

केस- 2 सांगानेर मालपुरा गेट स्थित हलवाई की दुकान जहां सरेआम घरेलू सिलेंडर का उपयोग होता हुआ मिला। जब इस बारे में पुछताछ की गई तो दुकानदार ने कहा सभी दुकानों पर इस्तेमाल होते है। अकेले हम ही थोड़े कर रहे है। बात सुनकर जब संवाददाता ने दूसरी दुकान की ओर देखा तो वहां भी घरेलू सिलेंडर दिखाई दिया। वहीं उन्होंने बताया कि ये कोई नई बात नहीं है। ये तो शुरू से उपयोग में लेते आ रहे है। आज तक कोई पूछने वाला नहीं आया है।

केस-3 टोक रोड स्थित एयरपोर्ट पुलिया के पास चाय की दुकान जहां घरेलू सिलेंडर को छिपाकर उपयोग में लिया जा रहा था। दुकानदार से पूछने पर बताया कि कोई कार्रवाई नहीं होती है। बस थोड़ी सावधानी रखनी पड़ती है। क्योंकि कभी कभी अभियान चलता है। तो कुछ दिन तक बंद कर देते है। फिर कोई देखने वाला नहीं है। दुकानदार ने कहा कि आपको भी चाहिए तो बता देना आधी रात को ही उपलब्ध करवा दूंगा। बस पैसे ज्यादा लगेंगे।

 

उपभोक्ता हैं परेशान

घरेलू गैस के व्यवसायिक उपयोग से कालाबाजारी का बाजार मजबूत हो रहा है। शहर में रसोई गैस उपभोक्ता परेशान हो रहे है।वहीं दूसरी ओर चाय-नास्ता की दुकानों पर ये सिलेंडर आसानी से पहुंच रहे है। इससे कालाबाजारी के पैर और मजबूत होते जा रहे है।

उपयोग का गणित

19 किलो का व्यवसायिक सिलेंडर 1170 रुपये का आता है। जबकि 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर 640 रुपये में आसानी से मिल जाता है। उस पर भी करीब 150 रुपये की सब्सीड़ी मिलती है। यानी एक किलो गैस 27 रुपये सस्ती होती है। यहीं वजह है कि दुकानों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल किया जाता है।

 

ये है प्रावधान

- घरेलू गैस का दुरुपयोग किए जाने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995 व आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम 1980 के तहत निगरानी व दंड का प्रावधान है।

..तो कार्रवाई क्यों नहीं

क्या दुकानदारों में गलत कार्यों को लेकर प्रशासन व रसद विभाग का कोई डऱ नहीं है। क्या प्रशासन अवैध गतिविधियों को रोक पाने में असफल है। अगर नहीं तो इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। गैस ऐजेंसी के हॉकर कैसे इस काम को अंजाम दे रहे है।

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