पशुओं का टीकाकरण बन रहा परेशानी, फिर हुई मारपीट


एफआईआर दर्ज
टैगिंग की अनिवार्यता हटाए जाने की मांग

By: Rakhi Hajela

Published: 18 Oct 2020, 09:14 PM IST


राजधानी जयपुर के दूदू स्थित मौजमाबाद पशु चिकित्सालय में पशुधन सहायक के साथ हुई मारपीट की घटना को अभी तीन दिन भी नहीं गुजरे थे कि कुछ एेसा ही वाकया अब हनुमानगढ़ में सामने आया है। हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील में राजकीय पशु उपकेंद्र किकराली में पदस्थापित एक पशुधन सहायक के साथ गाली गलौच किए जाने ओर एक अन्य कर्मचारी के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। जिसकी स्थानीय थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई।
यह था मामला
राजकीय पशु उपकेंद्र किकराली में पदस्थापित पशुधन सहायक अनिल कुमार और विभाग की ओर से अनुबंधित कर्मचारी विकास कुमार के साथ पशु पालन विभाग की ओर से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के तहत गाली गलौच और मारपीट की गई। जब दोनों किकराली में वार्ड नंबर ५ स्थित एक पशुपालक के घर टीकाकरण के लिए गए उस दौरान उनके साथ यह हादसा हुआ। पशुपालक जयसिंह ने न केवल उनके साथ गाली गलौच की बल्कि उनकी वैक्सीन करियर गिरा दिया और राजकार्य बाधा उत्पन्न की। जिससे विकास कुमार के हाथ पर चोट आई।
दरअसल पशुओं में होने वाले खुरपका.मुंहपका और बु्रसेलोसिस जैसी गंभीर बीमारी को जड़ खत्म करने के लिए राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024 तक 51 करोड़ से अधिक पशुओं के टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इन बीमारियों को 2024 तक नियंत्रित करना और 2030 तक पूरी तरह समाप्‍त करना है। खुरपका.मुंहपका एक संक्रामक बीमारी है जो विषाणु द्वारा फैलती है। इस बीमारी की कोई दवा नहीं सिर्फ टीकाकरण ही इसका इलाज है। पूरे देश में इस बीमारी को खत्म करने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। राज्य में भी यह अभियान चल रहा है। टीकाकरण से पूर्व पशु की ईयर टैगिंग भी विभाग की ओर से अनिवार्य की गई है। जिससे पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, लेकिन यह नहीं करवाना चाहते।
एेसे में जब पशुधन चिकित्सा कर्मचारी और पशु धन सहायक टीकाकरण के लिए जाते हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है।
इनका कहना है,
टीकाकरण दलों की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है ऐसे में डोर टू डोर जाकर काम करना संभव नहीं हो रहा है। विभाग को टीकाकरण अभियान गांव में शिविरों के माध्यम से करवाना चाहिए जिससे कि इस योजना में इच्छुक पशुपालक शिविर स्थल पर आकर अपने पशुओं के कान में टैग लगवा सके और पशुओं का टीकाकरण करवा सके। पशु, पशु मालिक की संपत्ति है यह उसकी इच्छा पर निर्भर है कि वह अपने पशु के कान में टैग लगवाए अथवा नहीं। विभाग अनावश्यक रूप से लक्ष्यों का दबाव डालकर टीका कर्मियों का जीवन खतरे में डाल रहा है।
अजय सैनी,प्रदेशाध्यक्ष,
राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ।

Rakhi Hajela Desk
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