शिक्षा राज्यमंत्री ने पीएम से झूठ बोला या विधानसभा में?

शिक्षा राज्यमंत्री ने पीएम से झूठ बोला या विधानसभा में?

Jaya Gupta | Publish: Feb, 15 2018 12:26:25 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

प्रदेश में माध्यमिक स्तर तक कला शिक्षा अनिवार्य है या नहीं, यह बात शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी को ही नहीं पता

जयपुर। प्रदेश में माध्यमिक स्तर तक कला शिक्षा अनिवार्य है या नहीं, यह बात शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी को ही नहीं पता। तभी तो अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग जवाब दे रहे हैं। देवनानी ने बुधवार को विधानसभा में कला शिक्षा की अनिवार्य विषय बताया, जबकि दो साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को दी गई सूचना में कला शिक्षा (चित्रकला व संगीत) को अनिवार्य नहीं बताया था। इस सूचना की नोटशीट पर भी देवनानी ने हस्ताक्षर किए थे।

 

विधानसभा में दिया यह बयान
शिक्षा विभाग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार देवनानी ने बुधवार को विधानसभा में कहा है कि नई शिक्षा नीति 1986 के अन्तर्गत चित्रकला एवं संगीत माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषयों के रूप में पढ़ाये जाते हैं। एन.सी.ई.आर.टी. की 3 सितम्बर 2004 की अधिसूचना के तहत विद्यालयों में इसे सहशैक्षणिक गतिविधि के तौर पर पढ़ाया जाता है एवं सप्ताह में इसके केवल दो कालांश आते हैं।

 

पीएम को भेजी थी यह सूचना
प्रधानमंत्री कार्यालय से कला शिक्षा विषय के संदर्भ में मांगी गई सूचनाओं के संदर्भ में शिक्षा विशेषाधिकारी बीके गुप्ता १४ जनवरी २०१६ को एक नोटशीट तैयार की थी। जिसमें कला शिक्षा विषय को ११वीं व १२वीं कक्षा में ऐच्छिक विषय बताया था। जबकि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में चित्रकला विषय अनिवार्य नहीं है। इस नोटशीट पर २५ जनवरी को शिक्षा मंत्री ने हस्ताक्षर भी किए। यह सूचना विभाग ने पीएम कार्यालय को भी भेजी गई।

 

यह झूठ भी बोला
पीएम कार्यालय की दी गई सूचना में प्रदेश में कला शिक्षा विषय के अध्यापकों के पद सृजित नहीं करने का कारण, विषय का अनिवार्य नहीं होना बताया था। जबकि देवनानी ने विधानसभा में कहा कि यह विषय बी.एस.टी.सी. के प्रशिक्षित अध्यापकों की ओर से पढ़ाए जा रहे हैं। नि:शुल्क अनिवार्य कला शिक्षण की अधिसूचना 2011 के तहत विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समितियों को यह अधिकार दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर मानदेय पर इन विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था कर सकते हैं। वर्तमान में इन विषयों का मूल्यांकन परीक्षाओं की श्रेणी में शामिल नहीं होता है एवं विद्यार्थियों को केवल गे्रड प्रदान की जाती है।

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