scriptVery important to check for CHD at birth | शिशु जन्म के समय सीएचडी की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण | Patrika News

शिशु जन्म के समय सीएचडी की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण


गर्भावस्था के दौरान वायरल इन्फेक्शन,गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना और इसके साथ ही शराब के सेवन बच्चे के लिए जन्मजात ह्रदय रोग यानी सीएचडी का कारण बन सकता है।अस्पतालों में इस प्रकार के सामने आ रहे हैं।

जयपुर

Published: November 19, 2021 12:46:56 am


गर्भावस्था के दौरान वायरल इन्फेक्शन,गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना और इसके साथ ही शराब के सेवन बच्चे के लिए जन्मजात ह्रदय रोग यानी सीएचडी का कारण बन सकता है।अस्पतालों में इस प्रकार के सामने आ रहे हैं। सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष डोरा ने कहा कि जन्मजात ह्रदय रोग यानी सीएचडी जन्म के समय से ही मौजूद होते हैं। यह बहुत सामान्य तो नहीं है, लेकिन इसे दुर्लभ मानकर खारिज भी नहीं किया जा सकता। पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का बढ़ता हुआ क्षेत्र इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार सीएचडी एक शिशु के ह्रदय की संरचना को प्रभावित कर सकता है,ए किस प्रकार खून ह्रदय से होता हुआ इसके बाहर शरीर के अन्य हिस्सों तक प्रवाहित होता है।:
ज़्यादातर शिशुओं में सीएचडी बहुत सारे घटकों के: कारण होता है। इसके होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं.
: आनुवंशिक उत्परिवर्तन : डाउन सिन्ड्रोम एक आनुवंशिक विकार है जो असामान्य कोशिका विभाजन के परिणाम स्वरुप गुणसूत्र एक अतिरिक्त संपूर्ण या आंशिक कॉपी तैयार होने के कारण होता है।
: गर्भावस्था के दौरान दवाइयां भी सीएचडी के लिए कारण बन सकती हैं. उदाहरण के लिए कुष्ठरोग के उपचार के लिए ली जाने वाली थैलिडोमाइड और जन्मजात समस्याओं के बीच एक संबंध पाया गया है
: जो लोग देरी से शादी करते हैं और जो 40 की उम्र के बाद गर्भावस्था धारण करते हैं ऐसे मामलों में सीएचडी की समस्या हो सकती है।
: परिवार में ही शादी करना भी एक कारक हो सकता है।
: गर्भावस्था के दौरान वायरल इन्फेक्शन के कारण भी सीएचडी की समस्या हो सकती है।
: पहले से मौजूद डायबिटीज़ या मोटापे की बीमारी का संबंध भी शिशु में ह्रदय विकारों से जुड़ा हुआ है।
: गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना और इसके साथ ही शराब के सेवन का संबंध भी ह्रदय विकारों से हो सकता है।
मां के गर्भाशय में विकास के दौरान कुछ जुड़ाव खुले हो सकते हैं जो जन्म के समय बंद नहीं होते। गर्भाशय में ह्रदय की शुरुआत एक एकल ट्यूब नली की तरह होती है और समय के साथ इसका विकास होता है। कुछ असामान्य बाएं.दाएं जुड़ाव गठित होते हैं जो प्रारंभिक बाल्यावस्था में ही कार्यात्मक समस्याएं निर्माण करते हैं। हम इसका वर्गीकरण इस प्रकार से कर सकते हैं:
सायनॉटिका: इसमें ह्रदय के ऐसे विकार शामिल हैं जो शरीर में अन्य जगह भेजी जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम करते हैं।
टेट्रालॉजी ऑफ फलो : एक सामान्य ह्रदय रोग है जो फेफड़ों में खून के कम प्रवाह के कारण उत्पन्न होता है। टेट्रालॉजी ऑफ फलो में एक शिशु के ह्रदय में चार प्रकार के विकार शामिल होते हैं।
ट्राइकस्पिड एट्रिशिया: ह्रदय कक्षों के बीच का वाल्व पूरी तरह विकसित नहीं होता है। इस रोग से पीड़ित शिशुओं की त्वचा नीले रंग की दिखाई देती है जिसे सायनोसिस कहा जाता है क्योंकि उनके खून में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त नहीं होती।
ट्रान्सपोज़ीशन ऑफ द ग्रेट वैसल्स : ह्रदय से जुड़ी हुई प्रमुख रक्त वाहिकाएं की अदला.बदली हो जाती है। इस अदला बदली के परिणामस्वरुप रक्त गलत जगहों में जाने लगता है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है।
एसायनॉटिक : इस तरह के ह्रदय विकार में खून में पर्याप्त ऑक्सीजन की मात्रा होती है लेकिन यह असामान्य तरीके से संपूर्ण शरीर में पंप होता है। यह विकार शरीर के अन्य हिस्सों में भेजे जाने वाले ऑक्सीजन या खून की मात्रा के साथ हस्तक्षेप नहीं करते।
शंट लीशन्स : इसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट जैसी संरचनात्मक समस्याएं शामिल होती है। यह ह्रदय के दो ऊपरी कक्षों को अलग करने वाली दीवार, जिसे एट्रिया कहते हैं के बीच एक छिद्र होता है। बड़े एएसडी को बंद करने के लिए एक पद्धति या हार्ट सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
वेन्ट्रिक्यूलर सेप्टल डिफेक्ट: सबसे अधिक सामान्य विकार है। इस तरह के विकार में ह्रदय के दो निचले कक्षों को अलग करने वाली दीवार के बीच एक छिद्र होता है।
ऑब्सट्रक्टिव लीशन्स : इसमें या तो एयोर्टिक वॉल्व या पल्मोनरी वाल्व संकरा हो सकता है और अच्छी तरह नहीं खुलता है। वॉल्व वन.वे यानि एक.मार्गी दरवाजे की तरह होते हैं। जब यह उचित रुप से कार्य नहीं करते हैं तो इसे स्टेनोसिस कहा जाता है।
सीएचडी मात्र 1 प्रतिशत जीवित जन्म के मामलों में देखा जाता है और इनमें से कईयों की छोटी उम्र में ही मृत्यु हो जाती है। इसलिए उम्र के साथ प्रतिशत बढ़ता जाता है। इसलिए जन्म के समय सीएचडी की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
गर्भावस्था के दौरान फीटल इकोकार्डियोग्राम की सहायता से कुछ सीएचडी का निदान किया जा सकता है। हालांकि कुछ ह्रदय विकारों का निदान गर्भावस्था के दौरान नहीं हो पाता। नवजात शिशु की जांच एक ऐसा साधन है जो सीएचडी की पहचान कर सकता है। नवजात शिशु के जन्म लेने के पहले सप्ताह के दौरान ह्रदय दर और ऑक्सीजन सैचुरेशन को मापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग किया जाता है। यह 95 से अधिक होना चाहिए।
शिशु जन्म के समय सीएचडी की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण
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