दर्शकों ने पिछवाई पेंटिंग्स की बारीकियां सीखी


पेंट ए पिछवाई' ऑनलाइन सेशन का समापन कल

By: Rakhi Hajela

Published: 12 Jul 2021, 07:57 PM IST



जयपुर, 12 जुलाई

कलाकार दिनेश सोनी का कहना है कि पिछवाई कला श्रीनाथजी और राधा कृष्ण के मंदिरों की दीवारों और मूर्तियों के पीछे लगाई हुई पाई जाती है। जेकेके की ओर से आयोजित ऑनलाइन सेशन 'पेंट ए पिछवाई' में कलाकार दिनेश सोनी ने प्रतिभागियों को पिछवाई कला शैली के बेसिक्स की जानकारी दी और बताया कि शरद पूर्णिमा, अन्नकूट, वन विहार, गोपाष्टमी आदि हर त्योहार की एक अलग पिछवाई होती है। भगवान कृष्ण को अक्सर पिछवाई में श्रीनाथजी के रूप में चित्रित किया जाता है, जो कि एक बाल रूप में प्रकट देवता हैं। पिछवाई चित्रों में पाए जाने वाले कुछ अन्य रूपांकन राधाए, गोपियां, बत्तख, मोर, गाय और कमल हैं। छोटे आकार में समकालीन पिछवाई कागज पर भी बनाई जा रही है। तकरीबन दस पंद्रह साल पहले पूरी तरह से गायब हो चुकी पिछवाई अब पुनर्जीवित हो गई है और लोग इस कला को पसंद कर रहे हैं। नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर है, वहां पिछवाई पर काम करने वाले कलाकार बेहद प्रतिभाशाली हैं।
सेशन पिछवाई के इतिहास, आमतौर पर कला शैली में तैयार किए गए रूपांकनों के साथ ड्रॉइंग और पेंटिंग तकनीकों पर केंद्रित था।
सेशन में सोनी ने श्रीनाथजी मुखर का चित्रण भी किया। उन्होंने एक इंच का बॉर्डर बनाने से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने शीट के बीच में एक रेखा खींची और चेहरे के एलीमेंट्स को समरूपता में बनाया। उन्होंने यह भी दिखाया कि कमल, कमल के पत्ते, मछली, मोर, फूल, पेड़ और बत्तख जैसे पिछवाई पेंटिंग में आमतौर पर पाए जाने वाले छोटे रूपांकनों को कैसे बनाया जाता है। मंगलवार को होने वाले सेशन में दिनेश सोनी पिछले सेशन में शुरू की गई पेंटिंग को पूरा करेंगे।

Rakhi Hajela Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned