अभिभावकों से किया वर्चुअल संवाद

अभिभावकों से किया वर्चुअल संवाद

By: Rakhi Hajela

Published: 15 May 2021, 12:14 AM IST



जयपुर, 14 मई
फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भले ही अपने आदेश दे दिए हो लेकिन निजी स्कूल संचालक अभी तक भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फीस की व्याख्या नहीं कर रहे हैं ना ही फीस एक्ट 2016 की अनुपालना कर रहे हैं उसके बावजूद जबर्दस्ती फीस का दबाव बनाकर अभिभावकों को लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है और बच्चों को ऑनलाइन क्लास तक रोकी जा रही एवं धमकियां दी जा रही हैं कि अगर 15 मई तक पूरी फीस जमा नहीं करवाई तो वह यह समझ लेंगे कि पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाई नहीं करवाना चाहते हैं। शुक्रवार को संयुक्त अभिभावक संघ ने प्रदेश के अभिभावकों से वर्चुअल संवाद किया, जिसमें अभिभावकों ने अपनी शंकाएं रखी जिसका संघ के पदाधिकारियों प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज शर्मा, प्रदेश संयुक्त मंत्री मनोज जसवानी, प्रदेश विधि मामलात मंत्री एडवोकेट अमित छंगाणी और जयपुर जिला अध्यक्ष युवराज हसीजा ने खुलकर जवाब दिया।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया संयुक्त अभिभावक संघ पिछले 7 दिनों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश और फीस एक्ट 2016 को लेकर वर्चुअल संवाद के जरिए प्रदेश के अभिभावकों से लगातार संवाद स्थापित अभियान चला रही है, जिसके माध्यम से अबतक करीबन प्रदेश के पांच हजार अभिभावकों संपर्क साध चुकी है। इस संवाद के दौरान जानकारी मिल रही है कि निजी स्कूल संचालक पिछले सत्र की तर्ज पर वर्तमान सत्र में भी अपनी हठधर्मिता दर्शा रहे हैं। शिक्षा अधिकारियों को लगातार शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं किंतु कार्यवाही नहीं हो रही है, केवल शिक्षा अधिकारी लिखित पत्र आदेश जारी कर खानापूर्ति कर रही है शिकायतों पर संज्ञान नहीं ले रहे हैं। लगातार शिकायतें आ रही हैं कि पेरेंट्स कोरोना से संक्रमित हैं, कुछ पेरेंट्स एक्सीडेंट से पीडि़त है वह वर्तमान परिस्थिति में फीस जमा नहीं करवा पा रहे हैं। उसके बावजूद स्कूल संचालक बच्चों की ऑनलाइन क्लास बन्द कर रहे हैं, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट आदेश में कहा है कि कोई भी स्कूल बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल भी नहीं रोक सकता है।
जयपुर जिलाध्यक्ष युवराज हसीजा ने बताया कि प्रदेश में फीस को लेकर मामला जस की तस है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी स्कूल संचालक ना 6 किश्तों में फीस ले रहे हैं ना 15 प्रतिशत डिस्काउंट दे रहे हैं। राज्य सरकार से अपील है कि वह फीस मसले को गम्भीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करवाए और निजी स्कूलों की हठधर्मिता पर लगाम लगवाए।

Rakhi Hajela Desk
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